स्मार्ट सिटी देहरादून की बदहाल सड़कें, गड्ढों के बीच रेंगने को मजबूर हैं आम लोग उत्तराखंड एक महीने पहले 53
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जगह-जगह खोदी गई सड़कों ने निवासियों और पर्यटकों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं, जबकि प्रशासन के गड्ढा मुक्त करने के दावे फेल साबित हो रहे हैं।

विकास की धूल और गड्ढों का दर्द

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून इन दिनों 'स्मार्ट सिटी' के नाम पर बदहाली की मार झेल रहा है। बुनियादी ढांचे को सुधारने के दावे के साथ शहर के कई प्रमुख रास्तों को खोदकर छोड़ दिया गया है। वर्तमान में पर्यटन का पीक सीजन चल रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले सैलानी भी सड़कों पर रेंगते ट्रैफिक और उड़ती धूल के गुबार से परेशान हैं। अव्यवस्थित प्लानिंग के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

नागरिकों का आक्रोश और सवाल

स्थानीय आरटीआई एक्टिविस्ट अजय नारायण शर्मा ने प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया है। उनका कहना है कि आम नागरिक अपनी गाड़ियों के लिए टैक्स भरता है, लेकिन बदले में उन्हें जर्जर सड़कें मिलती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि वाहन के कागजात या लाइसेंस न होने पर भारी चालान काटे जा सकते हैं, तो सड़कों की बदहाली के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?

  • कांवली रोड, हरिद्वार रोड, आढ़त बाजार और सहस्त्रधारा रोड जैसे मुख्य मार्गों की हालत बेहद खराब है।
  • प्रशासन द्वारा 15 जून तक सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का वादा किया गया था, जो पूरी तरह अधूरा है।
  • फेसबुक पर फोटो टैग अभियान चलाकर समस्याओं के समाधान का दावा भी कागजी साबित हुआ है।

जवाबदेही का घोर अभाव

अजय नारायण शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों का उदाहरण देते हुए कहा कि विदेशों में बुनियादी सुविधाओं में कोताही बरतने पर बड़े अधिकारियों और मेयर की कुर्सी तक चली जाती है। यहाँ स्थिति यह है कि अगर गड्ढों के कारण कोई दुर्घटना होती है, तो भी कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं होता। उन्होंने चेतावनी दी है कि वे जल्द ही आरटीआई क्लब के साथ मिलकर इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।

प्रशासन का क्या है पक्ष?

देहरादून नगर निगम के मेयर सौरभ थपलियाल का कहना है कि शहर को गड्ढा मुक्त बनाने का काम तेजी से चल रहा है। उन्होंने दावा किया कि हर पार्षद को अपने वार्ड की जिम्मेदारी सौंपी गई है और इसकी लगातार समीक्षा भी की जा रही है। हालांकि, मानसून की दस्तक के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि 100 वार्डों में से कितनी सड़कों को बारिश से पहले दुरुस्त किया जा पाता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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