उत्तराखंड में मौसम का कहर: देहरादून से बागेश्वर तक 4 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी उत्तराखंड एक घंटा पहले 4
उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता के चलते मौसम विभाग ने देहरादून, पिथौरागढ़, नैनीताल और बागेश्वर के लिए भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है, साथ ही 31 अगस्त तक सतर्क रहने की चेतावनी दी गई है।

उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता और IMD की चेतावनी

उत्तराखंड के अधिकांश हिस्सों में 26 अगस्त, 2026 को मानसून का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने राज्य के निवासियों के लिए मौसम का अलर्ट जारी किया है, जिसमें खासतौर पर चार जिलों को लेकर सतर्कता बरतने को कहा गया है। विभाग के मुताबिक, देहरादून, पिथौरागढ़, नैनीताल और बागेश्वर में आज मौसम बेहद खराब रहने की आशंका है। इन क्षेत्रों के लिए येलो अलर्ट जारी करते हुए मौसम वैज्ञानिकों ने तेज बारिश, गरज और चमक के साथ आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई है।

लगातार बारिश और प्रशासन की सतर्कता

राज्य में मानसून की सक्रियता अभी थमी नहीं है और 31 अगस्त तक प्रदेश के कई हिस्सों में बहुत अधिक बारिश होने के आसार जताए गए हैं। बीते 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो देहरादून और पौड़ी सहित राज्य के विभिन्न जिलों में 81 से 82 मिमी तक भारी वर्षा दर्ज की गई है। हालांकि मौसम विभाग का यह कहना है कि स्थितियां पहले के मुकाबले कुछ बेहतर हुई हैं, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित रहने और सतर्क रहने की अपील की है। अगले 24 घंटे के लिए जिन इलाकों में ऑरेंज अलर्ट घोषित किया गया है, वहां बहुत भारी बारिश की पूरी संभावना बनी हुई है, विशेषकर देहरादून, पिथौरागढ़ और बागेश्वर के कुछ चुनिंदा स्थानों पर।

मौसम विभाग द्वारा जताई गई प्रमुख चिंताएं

मौसम के बिगड़े मिजाज को देखते हुए प्रशासन और आम नागरिकों को निम्नलिखित समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:

  • सड़कों पर भारी जलभराव की स्थिति उत्पन्न होना।
  • पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और पहाड़ों से चट्टानें खिसकने का खतरा।
  • मुख्य सड़कों और पुलों का क्षतिग्रस्त होना।
  • संवेदनशील स्थानों पर अचानक बाढ़ आने की गंभीर आशंका।
  • स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए असुरक्षित मार्ग और आवाजाही में बाधा।

चमोली में प्राकृतिक आपदा का दंश

चमोली जिले में मौसम की मार सबसे ज्यादा देखने को मिल रही है। देवाल विकासखंड के हरमल गांव का बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह टूट गया है। सुयालकोट के समीप हुए भूस्खलन की वजह से देवाल-खेता मोटर मार्ग पहले से ही बंद पड़ा था, लेकिन अब पैदल रास्ता भी मलबे की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गया है। ग्रामीण लंबे समय से वैकल्पिक रास्तों का सहारा ले रहे थे, लेकिन अब उनके सामने संकट और गहरा गया है। इसके अलावा गनाई और किमाणा गांव में भी लगभग 30 से अधिक घरों में दरारें आ गई हैं, जो भू-धंसाव की गंभीर स्थिति को दर्शाती हैं। ज्ञात हो कि 2023 में जोशीमठ और कर्णप्रयाग क्षेत्र में भी भू-धंसाव के चलते 800 से ज्यादा घर प्रभावित हुए थे, जिसके बाद से क्षेत्र के निवासी लगातार दहशत के साये में जी रहे हैं।

मानसरोवर मार्ग पर लैंडस्लाइड का असर

पिथौरागढ़ में स्थित मानसरोवर यात्रा रोड पर हुए लैंडस्लाइड ने यातायात को पूरी तरह बाधित कर दिया है। चीन और नेपाल की सीमाओं को आपस में जोड़ने वाले इस महत्वपूर्ण हाईवे पर पांगला के पास एक विशाल पहाड़ी का हिस्सा भरभराकर सड़क पर आ गिरा है। इस घटना के बाद मार्ग पर वाहनों की आवाजाही ठप हो गई है। सड़क को सुचारू करने के लिए सीमा सड़क संगठन यानी BRO की टीम को मौके पर रवाना कर दिया गया है। कुल मिलाकर उत्तराखंड में अगले कुछ दिन मौसम की दृष्टि से बेहद चुनौतीपूर्ण रहने वाले हैं और नागरिकों को हर संभव सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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