दतिया में नकली अफसर का खौफनाक खेल: चाचा-भतीजे से वसूले 1 करोड़ से ज्यादा, साजिश के पीछे निकला पुराना परिचित मध्य प्रदेश एक घंटा पहले 2
दतिया में एक शख्स ने नकली पुलिस वर्दी पहनकर खुद को बड़ा अधिकारी बताया और एक प्रतिष्ठित सर्राफा परिवार के चाचा-भतीजे से कुल 1 करोड़ 9 लाख 50 हजार रुपये ऐंठ लिए। इस पूरी साजिश की पटकथा परिवार के एक पुराने परिचित रिटायर्ड प्रोफेसर ने लिखी थी।

दतिया से ब्लैकमेलिंग का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक व्यक्ति ने पुलिस की नकली वर्दी पहनकर बड़े अधिकारी का स्वांग रचा और शहर के नामी सर्राफा परिवार से करोड़ों रुपये वसूल लिए। पीड़ित परिवार के चाचा और भतीजे से कुल मिलाकर एक करोड़ 9 लाख 50 हजार रुपये ऐंठ लिए गए।

परिवार की साख ही बनी सबसे बड़ा हथियार

दतिया के प्रतिष्ठित सर्राफा कारोबारी अरविंद अग्रवाल और उनके दिवंगत चचेरे भाई रोहित अग्रवाल का परिवार वर्षों से सोने-चांदी के कारोबार में सक्रिय है। बाजार में परिवार की अच्छी प्रतिष्ठा है, और गिरोह ने इसी साख को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया। पुलिस जांच में जो खुलासा हुआ, वह हैरान करने वाला रहा।

रिटायर्ड प्रोफेसर ने लिखी पटकथा

पुलिस के मुताबिक इस पूरे खेल की कथित पटकथा रिटायर्ड प्रोफेसर अशोक कुमार गुप्ता ने तैयार की। प्रोफेसर की कारोबारी परिवार से पुरानी जान-पहचान थी और इसी भरोसे का इस्तेमाल किया गया। साजिश को अंजाम देने के लिए फर्जी डीआईजी बनकर मनीष कुमार को आगे किया गया।

अक्टूबर 2024 से शुरू हुई वसूली

अक्टूबर 2024 में मनीष कुमार काली वर्दी पहनकर अरविंद अग्रवाल की दुकान पर पहुंचा। उसने खुद को एंटी करप्शन एंड क्राइम कंट्रोल फोर्स का डीआईजी बताया और एक कथित फर्जी एफआईआर दिखाकर कारोबारी को जेल भेजने की धमकी दी। परिवार की प्रतिष्ठा और कारोबार पर खतरे का डर दिखाकर ब्लैकमेलिंग का सिलसिला शुरू हुआ।

डर के साये में अरविंद अग्रवाल लगातार आरोपियों के दबाव में आते चले गए। अक्टूबर 2024 से मार्च 2025 तक अलग-अलग किश्तों में उनसे करीब 80 लाख रुपये वसूल लिए गए। कभी केस खत्म कराने तो कभी समझौता करवाने के नाम पर रकम मांगी जाती रही।

चाचा के बाद भतीजे को बनाया निशाना

अरविंद अग्रवाल से मोटी रकम वसूलने के बाद गिरोह की नजर परिवार की नई पीढ़ी पर टिक गई। जून 2025 में मनीष कुमार ने अपना भेष बदला और इस बार खुद को एंटी करप्शन ब्यूरो झांसी का इंस्पेक्टर बताकर दिवंगत रोहित अग्रवाल के बेटे प्रियांश सिंघल की दुकान पर पहुंचा।

उसने प्रियांश को बताया कि उनके दिवंगत पिता पर प्रोफेसर का सोना बकाया है और इसकी शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो तक पहुंच चुकी है। कार्रवाई और बदनामी का भय दिखाकर जून से अगस्त 2025 के बीच प्रियांश से भी करीब 29 लाख 50 हजार रुपये वसूल लिए गए।

ठगी की रकम जमीन और गाड़ियों में लगाई

इस तरह चाचा अरविंद अग्रवाल और भतीजे प्रियांश सिंघल से कुल मिलाकर एक करोड़ 9 लाख 50 हजार रुपये ऐंठ लिए गए। हैरानी की बात यह रही कि आरोपी पूरे समय खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताकर रौब जमाता रहा और किसी को उस पर शक तक नहीं हुआ।

सफेद लग्जरी कार, अधिकारियों जैसी नंबर प्लेट, झांसी में आधुनिक ऑफिस और पुलिस जैसी वर्दी — मनीष कुमार ने ऐसा ताम-झाम खड़ा कर रखा था कि लोग उसे सचमुच बड़ा अधिकारी समझ बैठते थे। बताया जा रहा है कि ठगी की रकम से उसने जमीन और लग्जरी गाड़ियों में भी निवेश किया। लेकिन अपराध की यह स्क्रिप्ट एक छोटी-सी चूक से बिखर गई।

एक मुलाकात से खुली साजिश की पोल

कलेक्ट्रेट में हुई एक मुलाकात के दौरान प्रियांश सिंघल ने सीधे प्रोफेसर अशोक गुप्ता से उस अधिकारी की शिकायत कर दी, जो लगातार उनसे पैसे मांग रहा था। यह सुनते ही प्रोफेसर ने मनीष को पहचानने से ही इनकार कर दिया। यहीं से प्रियांश को शक हुआ और उन्होंने खुद पड़ताल शुरू कर दी। झांसी जाकर जानकारी जुटाने पर पता चला कि मनीष कुमार नाम का कोई अधिकारी संबंधित विभाग में है ही नहीं। इसके बाद पूरी जानकारी पुलिस को दी गई।

पुलिस ने बिछाया जाल, धराया आरोपी

10 जून को पुलिस ने जाल बिछाया। प्रियांश सिंघल ने आरोपी को पैसे देने के बहाने बुलाया और जैसे ही मनीष मौके पर पहुंचा, सादे कपड़ों में मौजूद पुलिस टीम ने उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए।

अब पुलिस आरोपी के बैंक खातों, संपत्तियों, कॉल डिटेल और उसके पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। वहीं, रिटायर्ड प्रोफेसर अशोक कुमार गुप्ता के खिलाफ भी थाना कोतवाली में मामला दर्ज किया गया है।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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