डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी से वैश्विक बाजार में हड़कंप, 2 फीसदी तक महंगा हुआ कच्चा तेल व्यापार एक महीने पहले 65
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है।

कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल

दुनिया भर के ऊर्जा बाजार में एक बार फिर से भारी अस्थिरता देखने को मिली है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही तनावपूर्ण स्थिति के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया चेतावनी ने कच्चे तेल के दाम बढ़ा दिए हैं। सोमवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 2 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त दर्ज की गई और यह 82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। इसके साथ ही अमेरिकी WTI क्रूड की कीमतें भी 78 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं। इस अचानक आई तेजी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार के निवेशकों और तेल आयात करने वाले देशों की परेशानी बढ़ा दी है।

ट्रंप की चेतावनी और बाजार पर असर

ट्रंप ने ईरान को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि हिजबुल्लाह द्वारा इजरायल पर हमलों का सिलसिला नहीं थमा या फिर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने जैसा कोई कदम उठाया गया, तो अमेरिका सख्त प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर होगा। इस बयान के बाद वैश्विक बाजारों में यह आशंका गहरा गई है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी कूटनीतिक बातचीत के नतीजे प्रभावित हो सकते हैं।

शांति वार्ता पर अनिश्चितता के बादल

स्विट्जरलैंड में दोनों देशों के बीच वार्ता का दौर चल रहा है। हालांकि ईरानी मीडिया की खबरों में दावा किया गया कि ट्रंप की धमकी के बाद तेहरान ने कुछ समय के लिए बातचीत को रोक दिया था, लेकिन वार्ता से जुड़े आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि चर्चा की प्रक्रिया जारी है और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर संवाद किया जा रहा है।

होर्मुज जलडमरूमध्य की अहमियत

इस पूरे मामले के केंद्र में होर्मुज जलडमरूमध्य है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक प्रमुख समुद्री मार्ग है। दुनिया का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से तेल की आपूर्ति प्राप्त करता है। ईरान की तरफ से इस मार्ग को बंद करने के दावे किए गए हैं, हालांकि वर्तमान में तेल की आवाजाही अभी भी सामान्य बनी हुई है।

भारत के लिए क्या हैं चुनौतियां

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मुख्य रूप से आयात पर निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के भीतर पेट्रोल, डीजल और गैस सिलेंडर की कीमतों पर पड़ सकता है। परिवहन लागत बढ़ने से महंगाई का दबाव भी आम जनता पर बढ़ सकता है। बीते कुछ हफ्तों में तेल की कीमतें 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास सिमट गई थीं, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव ने फिर से बाजार को ऊपर धकेल दिया है।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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