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एक घंटा पहले
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कच्चे तेल के दामों में फिर दर्ज की गई बढ़त
सोमवार के कारोबारी सत्र में कच्चे तेल की कीमतों ने एक बार फिर ऊपर की ओर रुख किया है। अमेरिका और ईरान के मध्य हुई ताजा सैन्य झड़पों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को लेकर नई भू-राजनीतिक चिंताएं पैदा कर दी हैं। इन हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतें फिर से 70 डॉलर प्रति बैरल के स्तर के नजदीक पहुंच चुकी हैं। हालांकि, होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखा जा रहा है, लेकिन फारस की खाड़ी के क्षेत्रों में अभी भी बड़ी संख्या में जहाजों का जमावड़ा बना हुआ है।
चार महीने के निचले स्तर से कीमतों में सुधार
केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया ने स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच ताजा सैन्य हमलों के चलते आपूर्ति संबंधी आशंकाएं फिर से गहरा गई हैं। इसी कारण कच्चे तेल की कीमतों में चार महीने के निचले स्तर से सुधार देखा गया है। तनाव की शुरुआत गुरुवार को हुई थी, जब ईरान ने एक कंटेनर जहाज को निशाना बनाया था। इसके बाद शुक्रवार को अमेरिका ने जवाबी हमला किया और शनिवार को फिर से तनाव बढ़ गया, जब ईरान ने कतर के लिए तेल ले जा रहे एक अन्य जहाज पर हमला कर दिया।
दोहा में शांति वार्ता की तैयारी
क्षेत्र में जारी भारी तनाव के बावजूद, अमेरिका और ईरान दोनों पक्ष कतर की राजधानी दोहा में इस सप्ताह होने वाली शांति वार्ता से पूर्व और अधिक सैन्य कार्रवाई न करने के लिए तैयार हो गए हैं। अंतरिम शांति समझौते के परिणाम स्वरूप होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में कुछ सुधार हुआ है, फिर भी फारस की खाड़ी में सैकड़ों जहाज अब भी फंसे हुए हैं। इस स्थिति के चलते जहाज मालिकों के बीच अभी भी सावधानी और सतर्कता का माहौल बना हुआ है।
कच्चा तेल और नेचुरल गैस की बाजार स्थिति
वेबसाइट oilprice.com के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार को भारतीय समयानुसार सुबह 8.25 बजे के करीब WTI क्रूड में 1.01 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 69.93 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। ब्रेंट क्रूड में भी 0.50 प्रतिशत की बढ़त देखी गई, जिसके बाद इसका भाव 72.35 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। हालांकि, मरबन क्रूड के भाव में 3.65 प्रतिशत की बड़ी गिरावट आई और यह 66.54 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ गया। कच्चे तेल के अलावा, नेचुरल गैस की कीमतों में भी तेजी देखी गई है, जो 0.82 प्रतिशत बढ़कर 3.306 डॉलर प्रति MMBtu पर पहुंच गई है।
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