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2 महीने पहले
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विचारों
सेशेल्स की गोल्डन जुबली पर भारत का विशेष प्रदर्शन
हिंद महासागर के महत्वपूर्ण द्वीप राष्ट्र सेशेल्स ने अपनी आजादी की 50वीं वर्षगांठ यानी गोल्डन जुबली का आयोजन बड़े हर्षोल्लास के साथ किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर भारत ने अपनी रक्षा साझेदारी और मजबूत कूटनीतिक संबंधों का प्रदर्शन करते हुए एक बड़ी भागीदारी निभाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की, जो दोनों देशों के बीच की प्रगाढ़ मित्रता को दर्शाता है। इस दौरान भारतीय सैन्य दल की सक्रिय मौजूदगी ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।
परेड में दिखा भारतीय सेना और नौसेना का अनुशासन
राजधानी पोर्ट विक्टोरिया में आयोजित राष्ट्रीय दिवस परेड में भारतीय सैन्य टुकड़ियों ने विशेष आकर्षण पैदा किया। भारतीय सेना की असम रेजिमेंट के 32 सैनिकों ने परेड में हिस्सा लिया, जिसका नेतृत्व कैप्टन आर्यन एच. देओलकर ने किया। इसके अतिरिक्त, भारतीय नौसेना का मार्चिंग दल और नौसैनिक बैंड भी इस परेड का हिस्सा बना। भारतीय नौसेना के दो प्रमुख युद्धपोत, अग्रिम पंक्ति का युद्धपोत आईएनएस तरकश और स्वदेशी सर्वेक्षण पोत आईएनएस इक्षाक, 26 जून को ही पोर्ट विक्टोरिया पहुंच गए थे, जिन्होंने इस समारोह में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई।
चीन की बढ़ती दिलचस्पी और रणनीतिक दांव
एक तरफ जहां भारत और सेशेल्स अपने रक्षा संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहे हैं, वहीं इस समारोह में चीन के युद्धपोतों का पहुंचना अंतरराष्ट्रीय हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने हिंद महासागर क्षेत्र में श्रीलंका, मालदीव और पाकिस्तान जैसे देशों में बड़े बंदरगाहों के निर्माण के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीन की स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स रणनीति का हिस्सा है। सेशेल्स की भौगोलिक स्थिति उसे पश्चिमी हिंद महासागर में एक बेहद रणनीतिक बिंदु बनाती है, जहां से भारत चीनी नौसेना की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने में सक्षम है। यही वजह है कि भारत और चीन दोनों ही इस छोटे से द्वीप राष्ट्र के साथ अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं।
समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग का नया अध्याय
भारतीय नौसेना के अनुसार, इन युद्धपोतों की तैनाती केवल एक समारोह तक सीमित नहीं थी। ये जहाज सेशेल्स रक्षा बलों के साथ संयुक्त सैन्य अभ्यास, पेशेवर संवाद और विभिन्न सामुदायिक कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। इन प्रयासों का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम रेजिमेंट और भारतीय नौसेना की भागीदारी को भारत और सेशेल्स के बीच की गहरी और जीवंत मित्रता का प्रमाण बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सैन्य दल का यह प्रदर्शन दुनिया के सामने दोनों देशों के रक्षा संबंधों की मजबूती का संदेश है।
भारत-सेशेल्स की दशकों पुरानी मित्रता
भारत और सेशेल्स के बीच संबंधों की जड़ें कई दशकों पुरानी हैं। दोनों देशों के बीच न केवल ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समानताएं हैं, बल्कि जन-जन के बीच भी गहरे संबंध हैं। समय के साथ ये रिश्ते अब रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण और विकास से जुड़ी परियोजनाओं तक विस्तृत हो चुके हैं। भारत हिंद महासागर क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए सेशेल्स का सबसे प्रमुख साझेदार माना जाता है। दोनों राष्ट्र आतंकवाद, समुद्री डकैती और अन्य उभरती समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए साझा प्रतिबद्धता रखते हैं।
एजम्पशन आइलैंड प्रोजेक्ट का महत्व
सेशेल्स का महत्व केवल उसकी खूबसूरती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के समुद्री व्यापार और सुरक्षा के लिए एक लाइफलाइन के समान है। 115 द्वीपों से मिलकर बने इस देश के साथ भारत एजम्पशन आइलैंड को विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता कर चुका है। इस प्रोजेक्ट के माध्यम से भारत वहां एयरस्ट्रिप, बुनियादी ढांचा और अन्य समुद्री सुविधाएं तैयार कर रहा है। यह परियोजना हिंद महासागर में भारत की पकड़ मजबूत करने और समुद्री गतिविधियों पर नियंत्रण रखने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जाती है।
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