उत्तर प्रदेश
एक महीने पहले
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अयोध्या में वकीलों का बड़ा विरोध प्रदर्शन
अयोध्या में राम मंदिर को मिले दान में कथित चोरी के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस पूरे प्रकरण को लेकर फैजाबाद बार एसोसिएशन ने एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की, जिसमें कई सख्त फैसले लिए गए। वकीलों ने साफ कर दिया है कि वे इस मामले से जुड़ी किसी भी गतिविधि को गंभीरता से ले रहे हैं और इसके दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
तीन दिन का अल्टीमेटम और चेतावनी
फैजाबाद बार एसोसिएशन के वकीलों ने एक बड़ा कदम उठाते हुए चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को तीन दिन के भीतर अयोध्या छोड़ने की चेतावनी दी है। अधिवक्ताओं का कहना है कि यदि इन तीन दिनों के अंदर वे शहर नहीं छोड़ते हैं, तो वकील पूरी अयोध्या को जाम कर देंगे और किसी को भी शहर में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। इसके साथ ही, वकीलों की मांग है कि इन तीनों व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए।
आरोपियों का केस लड़ने पर भारी जुर्माना
बार एसोसिएशन ने यह कड़ा निर्णय लिया है कि संघ का कोई भी सदस्य, चाहे वह सरकारी वकील हो, नामित हो या निजी तौर पर प्रैक्टिस कर रहा हो, राम मंदिर दान चोरी मामले के आरोपियों की पैरवी नहीं करेगा। यदि कोई वकील इस आदेश का उल्लंघन करके आरोपियों का केस लड़ता है, तो उसे न केवल बार एसोसिएशन से बाहर कर दिया जाएगा, बल्कि उस पर पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
सीबीआई जांच की पुरजोर मांग
अधिवक्ता संघ के सदस्य कलिका प्रसाद मिश्र ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि वे इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग कर रहे हैं। इस संबंध में एक पत्र भी लिखा जाएगा। यदि इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित याचिकाओं के जरिए सीबीआई जांच के आदेश नहीं मिलते हैं, तो बार एसोसिएशन इस मुद्दे को लेकर पहले उच्च न्यायालय और आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया तक जाएगा।
कानूनी लड़ाई और प्राथमिकी की प्रक्रिया
वकील इस बात पर अडिग हैं कि चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा के विरुद्ध जल्द से जल्द प्राथमिकी दर्ज होनी चाहिए। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने स्पष्ट किया है कि सबसे पहले स्थानीय पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराने का प्रयास किया जाएगा। यदि पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो वे सीधे न्यायालय की शरण लेंगे और कानूनी प्रक्रिया के तहत अंतिम स्तर तक अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई वकील आरोपियों की पैरवी करने का इच्छुक है, तो उसे संघ में आवेदन देना होगा और प्रति अभियुक्त पांच लाख रुपये की सहयोग राशि जमा करनी होगी, जिसका उपयोग अभियोजन पक्ष की पैरवी के लिए किया जाएगा।
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