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एक घंटा पहले
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भारतीय क्रिकेट प्रेमियों और टीम मैनेजमेंट के लिए एक बार फिर वही चिंता भरी खबर लौट आई है। स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या दोबारा चोटिल हो गए हैं। बेंगलुरु स्थित बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) में उन्हें पूरी तरह फिट घोषित किए जाने में बस थोड़ी ही देर बाकी थी, मगर ठीक उसी मौके पर उनकी फिटनेस ने साथ छोड़ दिया।
फिटनेस टेस्ट में ही लग गई चोट
हार्दिक पंड्या अपनी पुरानी चोटों से उबरकर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में पूरी तरह फिट होने की कगार पर खड़े थे। लेकिन मैदान पर जल्द लौटने की यही हड़बड़ी उन्हें भारी पड़ गई। फिटनेस असेसमेंट के दौरान जब उनसे मैच जैसी परिस्थितियों में गेंदबाजी कराई गई, तो उनके शरीर ने जवाब दे दिया और इसी मूल्यांकन के बीच वे एक नई चोट का शिकार हो गए, जिसने भारतीय खेमे की परेशानी फिर बढ़ा दी है।
10 ओवर फेंकते ही दगा दे गया पैर
एक रिपोर्ट के अनुसार, इस ताजा चोट की सबसे बड़ी वजह फिटनेस टेस्ट में पंड्या से पूरे 10 ओवर गेंदबाजी कराना रही। वनडे क्रिकेट के लिहाज से खुद को साबित करने की कोशिश में जैसे ही हार्दिक ने अपने कोटे के पूरे 10 ओवर फेंके, उनके पैर की मांसपेशियों पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ गया। इसके फौरन बाद उन्हें दाहिने पैर में तेज दर्द महसूस हुआ। बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में आनन-फानन में स्कैन कराने पर डॉक्टरों ने 'क्वाड्रिसेप्स स्ट्रेन' यानी जांघ की मांसपेशियों में खिंचाव की पुष्टि की।
अफगानिस्तान वनडे सीरीज से बाहर
इस चोट का सबसे पहला और सीधा असर यह हुआ कि हार्दिक पंड्या शनिवार से शुरू हो रही भारत-अफगानिस्तान की तीन मैचों की घरेलू वनडे सीरीज से पूरी तरह बाहर हो गए हैं। इस सीरीज का पहला मुकाबला धर्मशाला के खूबसूरत मैदान पर खेला जाना है, जहां दर्शकों को उनके ऑलराउंड प्रदर्शन का इंतजार था। अब टीम इंडिया को उनके बिना ही उतरना होगा, जिससे टीम का संतुलन गड़बड़ा गया है।
कम से कम तीन हफ्ते बाहर
मेडिकल टीम और विशेषज्ञों के मुताबिक, क्वाड्रिसेप्स स्ट्रेन जैसी चोट से उबरकर दोबारा मैच-फिट होने में किसी खिलाड़ी को कम से कम तीन सप्ताह लगते हैं। यानी हार्दिक अगले 20-22 दिनों तक बल्ले या गेंद को हाथ तक नहीं लगा पाएंगे। वे बेंगलुरु में ही रहकर बीसीसीआई की मेडिकल टीम की निगरानी में अपना रिहैब शुरू करेंगे, ताकि चोट और गंभीर न हो।
वापसी के लिए इंग्लैंड सीरीज पर नजर
अफगानिस्तान सीरीज गंवाने के बाद हार्दिक पंड्या की निगाहें अब आने वाले विदेशी दौरों पर हैं। तीन हफ्ते के रिहैब के बाद जुलाई में भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज को उनकी वापसी के लिए सबसे पहला और मुफीद मौका माना जा रहा है। हालांकि इंग्लैंड की परिस्थितियां तेज गेंदबाजों के लिए काफी मुश्किल रहती हैं, ऐसे में वहां सीधे मैच खेलना उनके लिए आसान नहीं होगा।
क्या शरीर उठा पाएगा 10 ओवर का बोझ?
इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय क्रिकेट के सामने एक बड़ा और गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है। क्या हार्दिक पंड्या का शरीर अब वनडे में लगातार 10 ओवर गेंदबाजी का भार उठाने लायक है? जब-जब वे अपनी गेंदबाजी का वर्कलोड बढ़ाते हैं, उनका शरीर साथ छोड़ देता है। यह स्थिति बीसीसीआई और टीम के थिंक-टैंक के लिए सबसे बड़ी चिंता बन गई है, क्योंकि एक ऑलराउंडर के तौर पर उनका अधूरा इस्तेमाल टीम का संतुलन बिगाड़ देता है।
टी20 से दूर रखने का फैसला
हार्दिक की इसी शारीरिक संवेदनशीलता को देखते हुए चयनकर्ता अब बेहद सतर्क हो गए हैं। यही वजह है कि आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ आगामी टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए उन्हें भारतीय टीम में जगह नहीं दी गई। मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि फिलहाल हार्दिक के वर्कलोड को मैनेज करना उनकी प्राथमिकता है। चयनकर्ता उन्हें अभी सिर्फ 50 ओवर यानी वनडे फॉर्मेट तक सीमित रखना चाहते हैं, ताकि उनका करियर लंबा चले।
2027 वर्ल्ड कप पर टिका लॉन्ग-टर्म प्लान
अगरकर ने यह भी साफ किया है कि हार्दिक पंड्या और तेज गेंदबाज जसप्रित बुमराह को लेकर टीम इंडिया की दीर्घकालिक योजना क्या है। बोर्ड का पूरा ध्यान अब दक्षिण अफ्रीका में होने वाले 2027 वनडे वर्ल्ड कप पर है। अगरकर के अनुसार, हार्दिक को टी20 से आराम देने का मकसद यह देखना है कि क्या वे धीरे-धीरे अपनी लय हासिल कर पूरी तरह स्वस्थ रह सकते हैं, ताकि 2027 के महाकुंभ में भारत के लिए वे मुख्य हथियार साबित हों।
क्यों अहम हैं हार्दिक
भारतीय क्रिकेट में हार्दिक पंड्या कितने जरूरी हैं, इसका अंदाजा इसी से लगता है कि टीम के पास उनका कोई सटीक विकल्प नहीं है। घरेलू क्रिकेट और आईपीएल के जरिए शिवम दुबे और नीतीश कुमार रेड्डी जैसे युवाओं को परखा गया है, लेकिन इन दोनों में न तो हार्दिक जैसी 140 किमी/घंटा की रफ्तार से गेंदबाजी करने की क्षमता है और न ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मैच जिताने का वैसा अनुभव। उनकी गैरमौजूदगी में भारत को हर बार दो अलग-अलग खिलाड़ियों, यानी एक शुद्ध बल्लेबाज और एक शुद्ध गेंदबाज, को खिलाने पर मजबूर होना पड़ता है।
डराने वाला चोटों का इतिहास
हार्दिक पंड्या की इंजरी हिस्ट्री बेहद डरावनी रही है। पीठ की सर्जरी से लेकर टखने और अब जांघ की चोट तक, उनके करियर में लगातार ब्रेक लगते रहे हैं। बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में इस हफ्ते जो हुआ, उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि हार्दिक से लगातार उनके कोटे के पूरे ओवर फिंकवाने की उम्मीद रखना बहुत बड़ा जोखिम है।
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