बिहार
एक घंटा पहले
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गर्मी के मौसम में लू से बचने के लिए इंसान तो तरह-तरह के इंतजाम कर लेते हैं, लेकिन इस दौरान पशुओं की मुश्किलें कहीं ज्यादा बढ़ जाती हैं। उन्हें भी हीट स्ट्रेस की समस्या झेलनी पड़ती है। तेज धूप और लगातार बढ़ता तापमान न केवल उनकी सेहत पर असर डालता है, बल्कि दूध उत्पादन को भी प्रभावित करता है। ऐसी स्थिति में पशु विशेषज्ञ जानवरों को गर्मी से बचाने के लिए कई उपाय सुझाते हैं, जिनमें एक खास तरह का फव्वारा भी शामिल है।
इस फव्वारे की खूबी यह है कि बटन दबाते ही गौशाला में पानी की महीन फुहार चारों ओर फैलने लगती है और कुछ ही मिनटों में पूरा वातावरण ठंडा व सुहावना हो जाता है। पशुपालन विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर इसे सही ढंग से लगाया जाए तो यह बेहद कम खर्च में पशुओं को गर्मी से राहत दिलाने वाला असरदार तरीका साबित हो सकता है। इसके अलावा कुछ और उपायों से भी पशुओं को हीट स्ट्रेस से बचाया जा सकता है।
पहले समझें पशुओं में हीट स्ट्रेस क्या है
बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर डॉ. मनमोहन कुमार के अनुसार, जब वातावरण का तापमान सामान्य स्तर से ऊपर चला जाता है तो इसका प्रभाव इंसानों के साथ-साथ पशुओं पर भी पड़ता है। इसी स्थिति को हीट स्ट्रेस कहा जाता है।
उनके मुताबिक, पशुओं में हीट स्ट्रेस को कुछ प्रमुख लक्षणों से पहचाना जा सकता है। प्रभावित पशु सामान्य की तुलना में तेज और बार-बार सांस लेने लगते हैं। दुधारू पशुओं में दूध का उत्पादन अचानक घट जाता है, वहीं भूख कम होने की वजह से वे चारा और दाना भी कम मात्रा में खाते हैं। अगर समय रहते इन लक्षणों को पहचानकर सही प्रबंधन कर लिया जाए, तो पशुओं को गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाया जा सकता है।
राहत देने में फॉगर सिस्टम बेहतरीन
डॉ. मनमोहन कुमार बताते हैं कि गर्मी के दौरान पशुओं को राहत पहुंचाने के लिए गौशाला के अंदर फॉगर सिस्टम लगाया जा सकता है। इसके लिए पूरे शेड में एक पाइपलाइन बिछाई जाती है और तय दूरी पर फॉगर लगाए जाते हैं।
जैसे ही स्विच ऑन किया जाता है, पाइप में पानी का प्रवाह शुरू हो जाता है और फॉगर से बेहद महीन फुहार निकलने लगती है। यह फुहार कुछ ही मिनटों में गौशाला का तापमान कम कर देती है, जिससे माहौल ठंडा और आरामदायक हो जाता है और पशुओं को हीट स्ट्रेस से राहत मिलती है। किसी गौशाला में कितने फॉगर लगाए जाने हैं, यह उसकी लंबाई और आकार पर निर्भर करता है।
एक पशु पर रोजाना 80 से 100 लीटर पानी
डॉ. मनमोहन कुमार के अनुसार, गर्मी के दिनों में पशुओं को हीट स्ट्रेस से बचाने के लिए गौशाला का हवादार होना बेहद जरूरी है। शेड में क्रॉस वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि ताजी हवा का आना-जाना लगातार बना रहे। दिन में पशुओं को अधिकतर शेड के अंदर ही रखना चाहिए, जबकि रात के समय उन्हें खुले वातावरण में छोड़ा जा सकता है।
उन्होंने बताया कि पशुओं के लिए साफ और ठंडे पानी की पर्याप्त उपलब्धता भी आवश्यक है, ताकि वे जरूरत के मुताबिक भरपूर पानी पी सकें। पीने और नहलाने को मिलाकर एक पशु पर प्रतिदिन करीब 80 से 100 लीटर पानी की जरूरत पड़ सकती है। गर्मी का असर कम करने के लिए पानी में इलेक्ट्रोलाइट भी मिलाया जा सकता है।
आहार के मामले में संतुलन इस तरह रखना चाहिए कि चारे की मात्रा कम हो, लेकिन उसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक रहे। इससे पशुओं को पर्याप्त पोषण मिलता रहेगा और उनकी उत्पादन क्षमता पर असर नहीं पड़ेगा।
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