व्यापार
एक घंटा पहले
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देश के निर्यात ने मई में जोरदार छलांग लगाई। इस महीने निर्यात 18 प्रतिशत की बढ़त के साथ छह महीने के सबसे ऊंचे स्तर यानी 45.2 अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया। दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के बीच कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के आयात में हुई बढ़ोतरी ने व्यापार घाटे को 28.21 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया। हालांकि मासिक आधार पर देखें तो यह आंकड़ा अप्रैल के 28.38 अरब डॉलर के मुकाबले थोड़ा कम रहा। तुलना के लिए, पिछले साल मई में व्यापार घाटा 21.88 अरब डॉलर दर्ज किया गया था।
तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा आयात
इस साल मई में देश का आयात सालाना आधार पर 10 प्रतिशत बढ़कर तीन महीने के उच्चतम स्तर 73.41 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जिसके चलते बीते साल की तुलना में व्यापार घाटा और चौड़ा हो गया। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, दुनिया भर में बनी भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बावजूद देश का निर्यात मजबूत प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने मई के आंकड़ों को ''सबसे ज्यादा मासिक निर्यात आंकड़ों में से एक'' बताया और कहा कि मौजूदा रुझान को देखते हुए यह पूरा साल निर्यात के लिहाज से बेहतर साबित होगा।
निर्यात में किन क्षेत्रों ने निभाई अहम भूमिका
निर्यात में बढ़ोतरी को रफ्तार देने में जिन प्रमुख क्षेत्रों का योगदान रहा, वे इस प्रकार हैं:
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- पेट्रोलियम उत्पाद
- इंजीनियरिंग से जुड़ी वस्तुएं
- औषधि
वित्त वर्ष के पहले दो महीनों का हाल
चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों यानी अप्रैल-मई के दौरान देश का निर्यात 16.09 प्रतिशत बढ़कर 88.91 अरब डॉलर पर पहुंच गया, वहीं आयात 15.14 प्रतिशत की बढ़त के साथ 145.35 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। इस अवधि में कुल व्यापार घाटा 56.44 अरब अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया।
अप्रैल-मई में किन वस्तुओं का आयात सबसे ज्यादा बढ़ा
इन दो महीनों में सोने के आयात में सबसे तेज उछाल देखने को मिला। सोने का आयात 60 प्रतिशत बढ़कर 9.04 अरब डॉलर तक पहुंच गया। वहीं, कच्चे तेल का आयात 16.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 41.3 अरब डॉलर रहा।
पश्चिम एशिया को निर्यात की स्थिति
राजेश अग्रवाल ने बताया कि इस साल मई में पश्चिम एशिया को भारत का निर्यात लगभग पिछले साल जितने ही स्तर पर बना रहा, जबकि उस इलाके में कई तरह की रुकावटें मौजूद थीं। मई में पश्चिम एशिया को भारत का निर्यात मामूली गिरावट के साथ 5.30 अरब डॉलर रहा, जो मई 2025 में 5.38 अरब डॉलर था। इस क्षेत्र में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत ने ओमान के तीन बंदरगाहों- दुक्म, सोहर और सलालाह का उपयोग किया है।
अमेरिका और ईरान के बीच 107 दिनों का समझौता
ये आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 107 दिनों तक चले युद्ध को खत्म करने के लिए समझौता होने का ऐलान किया है। इसी युद्ध की वजह से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट पैदा हुआ था। अमेरिका-ईरान टकराव ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समेत कई अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जहाजों की आवाजाही को गहरे तौर पर प्रभावित किया। इस शांति समझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर किए जाएंगे। इस बीच, सरकारी अनुमान के मुताबिक मई में सेवाओं का निर्यात 36.76 अरब अमेरिकी डॉलर और आयात 19.06 अरब अमेरिकी डॉलर रहा।
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