चीन
2 घंटे पहले
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चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और आधुनिक हथियार
बदलते वैश्विक सामरिक परिदृश्य में दुनिया के तमाम देश अपनी रक्षा प्रणालियों को लगातार अपग्रेड करने की होड़ में लगे हैं। इस मामले में चीन अन्य देशों से काफी आगे निकल चुका है। बीजिंग न केवल अपनी जमीनी और हवाई सुरक्षा को मजबूत कर रहा है, बल्कि समुद्री सीमाओं पर भी अपनी पैठ को और अधिक घातक बना रहा है। चीन का मुख्य लक्ष्य एक ऐसी 'ब्लू वॉटर नेवी' का निर्माण करना है, जिसका दबदबा पूरी दुनिया में हो। इसी महत्वाकांक्षी योजना के तहत चीन लगातार अत्याधुनिक युद्धपोत, डिस्ट्रॉयर और पनडुब्बियों का निर्माण कर रहा है। इसी श्रृंखला में चीन ने एक ऐसी एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल पेश की है, जिसने न केवल अमेरिका की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि भारत के लिए भी एक बड़ी चुनौती पेश की है। इस मिसाइल का नाम YJ-20 है।
YJ-20 की तकनीकी क्षमता
YJ-20 एक अत्याधुनिक एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल है। हाइपरसोनिक होने के कारण इसे किसी भी पारंपरिक एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा ट्रैक करना या बीच रास्ते में नष्ट करना लगभग नामुमकिन है। चीन ने हाल ही में अपने टाइप-052D गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर से इस मिसाइल के सफल परीक्षण का वीडियो सार्वजनिक किया है। इसमें वर्टिकल लॉन्च सिस्टम यानी VLS के माध्यम से इस मिसाइल को दागे जाते हुए दिखाया गया है। हालांकि इस परीक्षण की सटीक तारीख की पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह चीन की समुद्री सैन्य क्षमता में आए बड़े बदलाव का संकेत है। इस मिसाइल को 'कैरियर किलर' भी कहा जाता है, क्योंकि यह बड़े विमानवाहक पोतों को निशाना बनाने में सक्षम है।
विकास और उत्पादन का सफर
YJ-20 का पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन पिछले साल सितंबर में बीजिंग में आयोजित एक सैन्य परेड के दौरान किया गया था। यह चीन की पहली समुद्री-आधारित यानी सी-बेस्ड हाइपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल है, जिसने अब उत्पादन के सभी चरणों को पूरा कर लिया है। दिसंबर 2025 में इसे चीन के बेहद उन्नत टाइप-055 डिस्ट्रॉयर से भी लॉन्च किया गया था, लेकिन अब इसे टाइप-052D युद्धपोत के साथ तैनात करना यह दर्शाता है कि चीन अपनी व्यापक नौसैनिक बेड़े को इस तकनीक से लैस कर रहा है। चीनी सैन्य विशेषज्ञ सॉन्ग झोंगपिंग का मानना है कि यदि चीनी नौसेना के सभी प्रमुख युद्धपोतों पर YJ-20 तैनात कर दी गई, तो यह विरोधी देशों की नौसेनाओं के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन जाएगी।
मिसाइल की विनाशक गति और रेंज
रिपोर्ट के अनुसार, YJ-20 की लंबाई लगभग 9 मीटर है और इसका व्यास 850 मिलीमीटर से कम है। इसकी मारक क्षमता 1,000 से 1,500 किलोमीटर के बीच आंकी गई है। उड़ान के बीच के चरण में यह मैक-6 से अधिक की रफ्तार पकड़ लेती है। इसकी सबसे डरावनी बात इसकी अंतिम चरण की गति है। अपने लक्ष्य पर हमला करते समय यह अनियमित तरीके से दिशा बदलकर मैक-10 यानी 12348 KMPH से अधिक की रफ्तार हासिल कर लेती है। यह मिसाइल महज 13 से 14 मिनट के भीतर अपनी अधिकतम दूरी तय करने में सक्षम है। इसकी तुलना में भारत की ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल भी काफी पीछे छूट जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मिसाइल 40 से 60 किलोमीटर की ऊंचाई पर ग्लाइड करती है, जिसके कारण अधिकांश रडार इसे समय रहते नहीं देख पाते हैं।
अमेरिका और वैश्विक सुरक्षा पर प्रभाव
वॉशिंगटन स्थित डिफेंस प्रायोरिटीज के एशिया प्रोग्राम डायरेक्टर लाइल गोल्डस्टीन के अनुसार, यह परीक्षण चीन की नौसेना में आधुनिक हथियारों के तेजी से एकीकरण को दर्शाता है। इससे दक्षिण चीन सागर और ताइवान के पास अमेरिकी नौसेना के सामने भारी परिचालन चुनौतियां पैदा हो गई हैं। भले ही अमेरिकी पनडुब्बियां प्रभावी साबित हो सकती हैं, लेकिन उनकी मौजूदा मिसाइल क्षमताएं इस चीनी खतरे का सामना करने के लिए अपर्याप्त हो सकती हैं।
चीनी नौसेना का विस्तार
चीनी सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो उनकी नौसेना के पास वर्तमान में 35 टाइप-052D और 10 टाइप-055 डिस्ट्रॉयर मौजूद हैं। टाइप-055 में 112 और टाइप-052D में 64 लॉन्च सेल की क्षमता है। रक्षा विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि अगर इन मिसाइलों की तैनाती बड़े पैमाने पर की जाती है, तो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में शक्ति का संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को अपनी पूरी रक्षा रणनीति को नए सिरे से लिखना पड़ेगा। चीन की यह कोशिश उसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक अजेय शक्ति के रूप में स्थापित करने की है।
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