विश्व
एक दिन पहले
8
विचारों
दिल्ली में आमने-सामने भारत और चीन
दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की महत्वपूर्ण बैठक के दौरान एक हाई-प्रोफाइल मुलाकात चर्चा का केंद्र रही। भारत के एनएसए अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच हुई इस चर्चा में भारत ने अपना रुख पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। डोभाल ने चीन को दो-टूक शब्दों में कहा कि दोनों देशों के बीच संबंधों की बहाली केवल आपसी सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर ही हो सकती है।
भारत की सख्त शर्तें
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस बैठक की जानकारी देते हुए बताया कि एनएसए अजीत डोभाल ने वांग यी के समक्ष यह बात मजबूती से रखी कि भारत-चीन के बीच रिश्तों में स्थिरता, भरोसा और रचनात्मकता होना अनिवार्य है। केवल इन्हीं आधारों पर दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास बढ़ सकता है। डोभाल ने जोर दिया कि दोनों शक्तियों को एक-दूसरे के संवेदनशील मुद्दों के प्रति अधिक संवेदनशील होना पड़ेगा, क्योंकि केवल बातचीत से सीमा पर शांति नहीं आ सकती।
साल 2020 के बाद रिश्तों में खटास
भारत और चीन के बीच कूटनीतिक तनाव का मुख्य कारण साल 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुआ हिंसक सैन्य टकराव है। इस घटना के बाद से दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए थे। हालांकि, इस बार की बातचीत को विदेश मंत्रालय ने रचनात्मक और भविष्य की दिशा में सकारात्मक बताया है, लेकिन भारत का स्टैंड अटल है। भारत का स्पष्ट मानना है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पूरी तरह शांति और चीनी सेना की वापसी के बिना सामान्य द्विपक्षीय संबंध बहाल नहीं किए जा सकते।
चीन का रुख
दूसरी ओर, चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने दावा किया कि भारत और चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि पार्टनर हैं। चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, वांग यी ने सीमा विवाद को बड़े द्विपक्षीय संबंधों पर हावी न होने देने की पुरानी बात दोहराई। उन्होंने व्यापार, वित्त, कानून और मीडिया जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और पुराने संवाद तंत्र को फिर से शुरू करने पर जोर दिया है।
Comments
0 comment