मलक्का के मुहाने पर चीन के लिए चक्रव्यूह, नातुना द्वीप पर भारत-इंडोनेशिया की साझा रणनीति बनेगी ड्रैगन का सिरदर्द विश्व 4 घंटे पहले 6
दक्षिण चीन सागर में बीजिंग की घुसपैठ रोकने के लिए भारत और इंडोनेशिया नातुना द्वीप समूह पर मजबूत सैन्य मोर्चा खड़ा कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार भारत की ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइलों की आपूर्ति को लेकर दोनों देशों के बीच गोपनीय बातचीत चल रही है।

दक्षिण चीन सागर में चीन की घुसपैठ और दबदबे की नीति के खिलाफ अब भारत खुलकर सामने आ गया है। बीजिंग की 'डराओ और कब्जा करो' रणनीति पर लगाम कसने के मकसद से भारत ने इंडोनेशिया के साथ मिलकर 'नातुना द्वीप समूह' पर एक मजबूत एंटी-चाइना सैन्य मोर्चा तैयार करने की योजना बनाई है। मलक्का स्ट्रेट के मुहाने पर बसे इस इलाके में भारत, इंडोनेशिया को ब्रह्मोस जैसी घातक सुपरसोनिक मिसाइलें और रणनीतिक मदद दे सकता है, जिससे चीन के व्यापारिक रास्ते पर सीधा दबाव बनेगा।

चीन के खिलाफ भारत-इंडोनेशिया की साझा रणनीति

एशिया में चीन की सबसे बड़ी कमजोरी मानी जाने वाली 'मलक्का स्ट्रेट' के ठीक मुहाने पर एक ऐसा सैन्य किला आकार ले रहा है, जिसने शी जिनपिंग सरकार की बेचैनी बढ़ा दी है। इस मजबूत मोर्चे को खड़ा करने वाले इस क्षेत्र के दो बड़े समुद्री ताकतवर देश भारत और इंडोनेशिया हैं। दोनों मिलकर एक ऐसी 'एंटी-चाइना फ्रंट लाइन' तैयार कर रहे हैं, जिसे भेद पाना चीनी सेना के लिए बेहद मुश्किल होगा। इस पूरी रणनीति का केंद्र इंडोनेशिया का नातुना द्वीप समूह (Natuna Islands) है, जिस पर चीन लंबे समय से नजरें गड़ाए बैठा है।

भारत के लिए इंडोनेशिया क्यों है अहम

समुद्री रास्तों के लिहाज से इंडोनेशिया दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और लाइफलाइन माने जाने वाले समुद्री मार्गों के बीच स्थित है। चीन का लगभग पूरा अंतरराष्ट्रीय व्यापार और उसकी फैक्ट्रियों को चलाने वाला खाड़ी देशों का तेल इसी मलक्का स्ट्रेट से होकर गुजरता है। ऐसे में इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति उसे एक ऐसा रणनीतिक लाभ देती है, जो चीन के विस्तारवाद को रोकने की ताकत रखता है। यही वजह है कि नई दिल्ली अब जकार्ता के साथ खुद को एक भरोसेमंद और बड़े साझेदार के रूप में पेश कर रही है। भारत ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि बीजिंग को इंडो-पैसिफिक यानी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को अपनी निजी जागीर समझने की भूल नहीं करनी चाहिए।

चीन की हरकतों से परेशान इंडोनेशिया

भारत और इंडोनेशिया के बीच इस गहरे तालमेल की सबसे बड़ी वजह चीन की ओर से इंडोनेशिया को मिलने वाली लगातार धमकियां और उकसावे वाली घटनाएं हैं। चीन अपनी अवैध और स्वयं के नक्शे पर बनाई गई काल्पनिक 'नाइन-डैश लाइन' के जरिए इंडोनेशिया के संप्रभु समुद्री क्षेत्र (EEZ) में बार-बार घुसपैठ की कोशिश करता रहता है।

खासकर गैस और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर नातुना द्वीप के आसपास चीन की गतिविधियां बहुत बढ़ गई हैं। चीनी कोस्ट गार्ड के बड़े युद्धपोत और भारी हथियारों से लैस 'फिशिंग मलीशिया' यानी मछुआरों के भेष में चीनी लड़ाके अक्सर इंडोनेशिया की समुद्री सीमा में घुस आते हैं और जकार्ता की संप्रभुता को खुली चुनौती देते हैं। इंडोनेशिया भी जानता है कि वह अकेले दम पर चीन जैसी ताकत का मुकाबला नहीं कर सकता, और ठीक इसी मोड़ पर भारत की भूमिका अहम हो जाती है।

ब्रह्मोस और सैन्य सहयोग का 'डबल डोज'

अब भारत और इंडोनेशिया मिलकर चीन को उसी की भाषा में जवाब देने की तैयारी कर चुके हैं। दोनों देशों की नौसेनाएं न केवल मैरीटाइम पेट्रोल यानी समुद्री गश्त में बेहतर तालमेल बना रही हैं, बल्कि रियल-टाइम इंटेलिजेंस यानी चीनी सेना की हरकतों की खुफिया जानकारी भी एक-दूसरे से साझा कर रही हैं। अगर चीन कोई दुस्साहस करता है तो उसे तुरंत और मौके पर ही जवाब देने के लिए दोनों देशों ने एक संयुक्त नेवल रिस्पॉन्स प्लान तैयार किया है।

इस गठबंधन को और मजबूत बनाने के लिए भारत अब इंडोनेशिया को भारी सैन्य ताकत और आधुनिक रक्षा तकनीक देने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक 'ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल' की आपूर्ति को लेकर बेहद गोपनीय बातचीत चल रही है। इंडोनेशिया के रणनीतिकार भी मानते हैं कि वे रातों-रात कोई बड़ी नौसेना खड़ी नहीं कर सकते, लेकिन अगर उनके पास ब्रह्मोस जैसी मारक मिसाइलें आ जाती हैं तो वे नातुना द्वीप पर बैठकर ही चीनी युद्धपोतों, चीन की मुख्य भूमि और उसके बड़े आर्थिक केंद्रों को सीधे निशाना बना सकते हैं। यह एक ऐसा गेम-चेंजर हथियार साबित होगा, जिसके बाद चीन इंडोनेशिया के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से पहले कई बार सोचने पर मजबूर हो जाएगा।

नातुना द्वीप समूह पर चीन की नजर क्यों

अब सवाल यह है कि समुद्र के बीचों-बीच स्थित इस छोटे से नातुना द्वीप समूह में आखिर ऐसा क्या है, जिसके लिए चीन अपनी अंतरराष्ट्रीय मर्यादा भूलकर दबाव की नीति पर उतर आया है। इसकी कई वजहें हैं।

समुद्र के नीचे छिपा गैस और तेल का भंडार

नातुना द्वीप के आसपास का समुद्री इलाका प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल का बड़ा भंडार है। यहां 'ईस्ट नातुना' नाम का एक विशाल गैस ब्लॉक है, जिसे दुनिया के सबसे बड़े अनछुए गैस भंडारों में से एक माना जाता है। चीन को अपनी फैक्ट्रियों को चौबीसों घंटे चलाने के लिए भारी मात्रा में ऊर्जा की जरूरत रहती है, इसलिए उसकी नजर इस इलाके के संसाधनों पर टिकी है।

मछलियों से भरपूर समुद्री क्षेत्र

यह पूरा इलाका समुद्री जीवों और मछलियों से भरा हुआ है। चूंकि चीन दुनिया में सी-फूड का सबसे बड़ा उपभोक्ता है और उसके अपने समुद्री इलाकों में अब ज्यादा मछलियां नहीं बची हैं, इसलिए वह नातुना के पास अपने हथियारबंद लड़ाकों को भेजकर इंडोनेशिया के हिस्से की मछलियां पकड़वाता है।

फर्जी 'नाइन-डैश लाइन' का दावा

चीन ने नक्शे पर अपनी मर्जी से नौ लाइनें खींच रखी हैं और दावा करता है कि पूरा दक्षिण चीन सागर उसी का है। इंडोनेशिया की अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा का कुछ हिस्सा चीन की इसी फर्जी लाइन से टकराता है। चीन इस इलाके पर कब्जा कर पूरे दक्षिण चीन सागर पर अपना दबदबा कायम करना चाहता है।

मलक्का स्ट्रेट को नियंत्रित करने की चाल

नातुना द्वीप समूह मलक्का स्ट्रेट के बिल्कुल मुहाने पर है, जहां से चीन का 80% तेल गुजरता है। चीन को हमेशा यह डर सताता है कि अगर भारत, अमेरिका या इंडोनेशिया मिलकर उसकी इस लाइफलाइन को रोक दें तो उसके लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाएगी—कूटनीति में इसे चीन का 'मलक्का डिलेमा' कहा जाता है। अगर चीन नातुना पर कब्जा कर लेता है तो वह वहां अपने रडार और मिसाइलें तैनात कर पूरे रास्ते की निगरानी कर सकता है और अपने प्रतिद्वंद्वियों को दूर रख सकता है।

नातुना बन सकता है चीन का बुरा सपना

सीधे शब्दों में कहें तो नातुना द्वीप समूह चीन के लिए 'सोने का अंडा देने वाली मुर्गी' जैसा है, जिससे उसे भरपूर गैस-तेल भी मिलेगा और दुश्मनों पर नजर रखने का पक्का ठिकाना भी। लेकिन भारत और इंडोनेशिया का यह नया सैन्य और रणनीतिक मोर्चा चीन के इसी सपने को एक भयानक चुनौती में बदलने जा रहा है। अब जबकि भारत के प्रधानमंत्री एक बार फिर इंडोनेशिया दौरे की तैयारी में हैं, तो कूटनीतिक मेज पर कई बड़े सैन्य समझौतों पर मुहर लग सकती है, जो आने वाले दिनों में एशिया की पूरी भू-राजनीति को प्रभावित कर सकते हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

आपकी प्रतिक्रिया?


आपको यह भी पसंद आ सकता हैं

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!