विश्व
एक घंटा पहले
3
विचारों
आसमान में चीन की नई ताकत
चीन ने एक बेहद आधुनिक और शक्तिशाली हवाई निगरानी विमान को विकसित किया है, जो दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों के लिए चर्चा का विषय बन गया है। KJ-3000 नाम का यह विमान विशाल कार्गो विमान Y-20B पर आधारित है। सैन्य भाषा में इसे अवाक्स या आसमान में उड़ने वाला रडार स्टेशन कहा जाता है। अमेरिकी रक्षा विभाग का मानना है कि यह विश्व का पहला ऐसा निगरानी विमान हो सकता है, जो पूरी तरह से डिजिटल रडार तकनीक पर आधारित है।
युद्ध के मैदान में फोर्स मल्टीप्लायर
इस तरह के विमानों को सैन्य रणनीति में फोर्स मल्टीप्लायर माना जाता है, क्योंकि ये युद्ध के मैदान में ताकत को कई गुना बढ़ाने की क्षमता रखते हैं। जमीन पर स्थित रडार की तुलना में ये विमान कहीं अधिक दूरी तक निगरानी करने में सक्षम हैं। ये हवा में रहकर न केवल दुश्मन के जहाजों पर नजर रखते हैं, बल्कि अपनी वायु सेना के लड़ाकू विमानों को दिशा-निर्देश देकर युद्ध की पूरी दिशा को नियंत्रित कर सकते हैं। दुश्मन के सिग्नल जाम करने वाले सिस्टम को भी यह विमान नाकाम करने में सक्षम है।
KJ-3000 की प्रमुख खासियतें
- यह विमान अत्याधुनिक डिजिटल रडार तकनीक से सुसज्जित है।
- इसमें एडवांस एंटी-जैमिंग सिस्टम है, जिससे दुश्मन के लिए इसे रोकना मुश्किल है।
- यह बहुत कम इलेक्ट्रॉनिक संकेत छोड़कर दुश्मन के ठिकानों का पता लगा सकता है।
- शक्तिशाली WS-20 इंजन इसे लंबी उड़ान भरने और लंबे समय तक हवा में रहने की क्षमता देते हैं।
वैश्विक संतुलन और भारत की स्थिति
वर्तमान में चीन के पास इस श्रेणी के 60 से अधिक विमान मौजूद हैं, जो ताइवान, तिब्बत और दक्षिण चीन सागर जैसे क्षेत्रों पर कड़ी नजर रखते हैं। हालांकि अमेरिका इस तकनीक में अब भी आगे है, लेकिन उसके पुराने E-3 सेंट्री विमानों के रिटायर होने से चीन तेजी से उस फासले को कम कर रहा है। भारतीय वायु सेना की बात करें तो फिलहाल भारत के पास 6 ऐसे निगरानी विमान हैं, जिनमें 3 इजरायली फाल्कन और 3 स्वदेशी नेत्रा शामिल हैं। भारत भी अब अपने बड़े विमानों पर स्वदेशी रडार तकनीक विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। यह विमान साबित करता है कि आने वाले समय में युद्ध केवल हथियारों के दम पर नहीं, बल्कि सूचना और डेटा की बढ़त से जीते जाएंगे।
Comments
0 comment