छतरपुर के 5 ऐतिहासिक स्थल जो आपको इतिहास की सैर पर ले जाएंगे, कम बजट में शाही अनुभव मध्य प्रदेश एक महीने पहले 67
यदि आप मानसून के दौरान मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो मऊ सहानिया और खजुराहो के ये पांच ऐतिहासिक स्थान आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं। इन धरोहरों का भ्रमण न केवल किफायती है, बल्कि यहां की प्राचीन वास्तुकला और बुंदेली इतिहास आपको एक अलग ही रोमांच का अनुभव कराएगा।

मानसून में छतरपुर की ऐतिहासिक यात्रा

अगर आप इस बारिश के मौसम में अपने परिवार या दोस्तों के साथ किसी नई जगह घूमने का मन बना रहे हैं, तो मध्य प्रदेश का छतरपुर जिला एक शानदार गंतव्य साबित हो सकता है। छतरपुर की मऊ सहानिया और खजुराहो जैसी जगहें अपनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत और अद्भुत वास्तुकला के लिए जानी जाती हैं। यहां आपको इतिहास के उन पन्नों को करीब से देखने का मौका मिलेगा जो बुंदेलखंड के गौरवशाली अतीत को दर्शाते हैं। ये स्थान न केवल प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे हैं, बल्कि इनका भ्रमण करना बेहद किफायती भी है।

मऊ सहानिया तक कैसे पहुँचें

मऊ सहानिया उन पर्यटकों के लिए एक प्रमुख केंद्र है जो महाराजा छत्रसाल के दौर की वास्तुकला को देखना चाहते हैं। यह स्थान छतरपुर जिले से लगभग 16 किमी की दूरी पर स्थित है। यदि आप खजुराहो एयरपोर्ट या खजुराहो रेलवे स्टेशन से यात्रा कर रहे हैं, तो आपको वहां तक पहुँचने में लगभग 1 घंटे का समय लग सकता है। वहीं, यदि आप छतरपुर रेलवे स्टेशन से आ रहे हैं, तो महज 20 किमी की दूरी तय करके आप यहां पहुँच सकते हैं। चूंकि ये सभी ऐतिहासिक इमारतें गांव के जंगलों और पहाड़ियों के बीच बसी हुई हैं, इसलिए बेहतर होगा कि आप अपनी सुविधा के अनुसार निजी कार बुक कर लें, ताकि आप आराम से हर जगह घूम सकें।

महाराजा छत्रसाल और मऊ सहानिया का इतिहास

मऊ सहानिया क्षेत्र महाराजा छत्रसाल के शासनकाल की यादों का एक बड़ा भंडार है। यहां फैली धरोहरों में धुबेला महल, धुबेला संग्रहालय, मस्तानी महल, रानी कमलापति स्मारक, हृदय शाह महल और शीतल गढ़ी प्रमुख हैं। ये स्थान आज भी उस दौर की भव्यता और बुंदेली स्थापत्य कला के बेजोड़ उदाहरण पेश करते हैं।

धुबेला महल और संग्रहालय

मऊ सहानिया में स्थित धुबेला महल का निर्माण महाराजा छत्रसाल ने 18वीं शताब्दी में करवाया था। इस महल का प्रवेश द्वार काफी विशाल और मेहराबदार है, जो उत्तर मध्यकालीन बुंदेली शैली की पहचान है। महल के अंदर ही स्थित धुबेला संग्रहालय पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र है। यहां आप महाराजा छत्रसाल के काल के प्राचीन अस्त्र-शस्त्र और कई अन्य दुर्लभ वस्तुएं देख सकते हैं, जो उस युग की जीवनशैली को स्पष्ट करती हैं।

शीतल गढ़ी का अद्भुत निर्माण

इतिहास के पन्नों में शीतल गढ़ी का भी विशेष स्थान है। इसका निर्माण महाराजा छत्रसाल के नाती द्वारा 17वीं शताब्दी में करवाया गया था। यह किला बुंदेली कला का एक उत्कृष्ट नमूना है। रोचक बात यह है कि इस किले की वास्तुकला इतनी शानदार है कि यह आज के आधुनिक एयर कंडीशनर को भी मात देती है, क्योंकि यह भीषण गर्मी में भी अंदर से ठंडा रहता है। इस किले को मुख्य रूप से आवासीय उद्देश्य और सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाया गया था।

रानी कमलापति और हृदय शाह का महल

मऊ सहानिया में रानी कमलापति का स्मारक भी है। रानी कमलापति, महाराजा छत्रसाल की पहली रानी थीं। उनके निधन के बाद, महाराजा ने उनकी स्मृति में इस दो मंजिला महल का निर्माण करवाया था। इस महल का प्रवेश द्वार मेहराबयुक्त है और इसमें 7 गुंबद बने हुए हैं, जो इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देते हैं। इसके अलावा, यहां महाराजा छत्रसाल के बड़े पुत्र हृदय शाह का महल भी स्थित है। हालांकि आज यह महल काफी हद तक खंडहर में बदल चुका है, लेकिन इसके अवशेषों को देखने के लिए बड़ी संख्या में पर्यटक यहां आते हैं।

महाराजा छत्रसाल का स्मारक

अपनी यात्रा के अंत में, आपको महाराजा छत्रसाल के उस स्मारक को जरूर देखना चाहिए जिसका निर्माण बाजीराव पेशवा प्रथम द्वारा कराया गया था। यह स्मारक न केवल महाराजा की वीरता और शौर्य गाथा का प्रतीक है, बल्कि इसी प्रांगण में उनके प्रिय घोड़े की समाधि भी बनी हुई है। इन तमाम ऐतिहासिक इमारतों और महलों का समूह मिलकर छतरपुर को एक अनूठा पर्यटन स्थल बनाता है, जहां आपको इतिहास के गौरव और कम खर्च में शाही अनुभव का सुखद मिश्रण मिलता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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