झारखंड
48 मिनट पहले
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विचारों
मिट्टी को बचाने की चुनौती
खेती की बढ़ती लागत और रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि किसान बेहतर पैदावार की उम्मीद में इनका प्रयोग करते हैं, लेकिन लंबे समय तक रसायनों का उपयोग मिट्टी की स्वाभाविक उपजाऊ शक्ति को खत्म कर रहा है। इससे न केवल मिट्टी जहरीली हो रही है, बल्कि इसका सीधा दुष्प्रभाव हमारी फसलों और अनाज की गुणवत्ता पर भी पड़ रहा है।
केंचुआ खाद क्यों है जरूरी
मिट्टी की सेहत को सुधारने और फसलों की पैदावार में बढ़ोतरी करने के लिए केंचुआ खाद यानी वर्मीकम्पोस्ट एक शानदार विकल्प के रूप में उभरा है। यह खाद मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करने के साथ-साथ पौधों को जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करती है।
घर पर खाद बनाने का आसान तरीका
बोकारो के कृषि वैज्ञानिक आदर्श कुमार ने केंचुआ खाद तैयार करने की प्रक्रिया को बेहद सरल बताया है। उनके अनुसार, गाय और भैंस के गोबर का उपयोग करके किसान खुद ही उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद का निर्माण कर सकते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में लगभग 75 दिन का समय लगता है, जिसके बाद खाद इस्तेमाल के लिए तैयार हो जाती है।
खाद बनाने के प्रमुख लाभ
- मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होता है और उसमें सुधार आता है।
- रासायनिक खाद पर निर्भरता कम होने से लागत में कमी आती है।
- फसलों की पैदावार में वृद्धि देखी जाती है।
- घर पर उपलब्ध गोबर का सही सदुपयोग होता है।
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