हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि के खिलाफ छात्रों का गुस्सा, ABVP की भूख हड़ताल का छठा दिन
हिमाचल प्रदेश
एक घंटा पहले
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हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में बढ़ा छात्रों का आक्रोश
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में स्थित हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय यानी एचपीयू में शैक्षणिक माहौल इन दिनों गरमाया हुआ है। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा शिक्षण शुल्क में की गई भारी बढ़ोतरी के विरोध में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद यानी एबीवीपी ने मोर्चा खोल दिया है। यह विरोध प्रदर्शन अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है, जहां परिषद के कार्यकर्ता लगातार छठे दिन भी अनिश्चितकालीन क्रमिक अनशन पर डटे हुए हैं। छात्रों का स्पष्ट कहना है कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार इस जनविरोधी फैसले को वापस नहीं लेते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।
क्या है पूरा विवाद और क्यों हो रहा है विरोध
विवाद की मुख्य जड़ शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए लागू की गई नई फीस संरचना है। विश्वविद्यालय के दूरवर्ती शिक्षा केंद्र यानी सीडीओई के तहत संचालित स्नातक, स्नातकोत्तर, व्यावसायिक और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों की फीस में विश्वविद्यालय प्रशासन ने 25 प्रतिशत तक का इजाफा कर दिया है। सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि यह बढ़ी हुई फीस केवल नए प्रवेश लेने वाले छात्रों पर ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय में पहले से अध्ययन कर रहे पुराने विद्यार्थियों पर भी समान रूप से लागू की गई है। एबीवीपी के प्रदेश अध्यक्ष कुणाल गंगटा का कहना है कि वर्तमान महंगाई के दौर में छात्रों और उनके परिवारों पर आर्थिक बोझ डालना किसी भी सूरत में उचित नहीं है।
विभिन्न पाठ्यक्रमों में कितनी बढ़ी फीस
विश्वविद्यालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, फीस वृद्धि का असर लगभग हर कोर्स पर पड़ा है। छात्रों को अब पहले की तुलना में काफी ज्यादा राशि चुकानी होगी। शुल्क में हुए बदलाव के कुछ प्रमुख आंकड़े इस प्रकार हैं:
- बीए प्रथम वर्ष की फीस अब 5,000 रुपये के स्थान पर 6,250 रुपये कर दी गई है।
- बीकॉम प्रथम वर्ष की फीस 5,600 रुपये से बढ़ाकर 7,000 रुपये निर्धारित की गई है।
- स्नातकोत्तर स्तर पर एमए के लिए छात्रों को प्रति सेमेस्टर 3,500 रुपये की जगह अब 4,375 रुपये चुकाने होंगे।
- एमकॉम की प्रति सेमेस्टर फीस 3,800 रुपये से बढ़कर 4,750 रुपये हो गई है।
- पत्रकारिता एवं जनसंचार के क्षेत्र में एमए की प्रति सेमेस्टर फीस 7,600 रुपये से बढ़ाकर 9,500 रुपये कर दी गई है।
- व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की बात करें तो एमबीए की प्रति सेमेस्टर फीस 18,500 रुपये से बढ़कर 23,125 रुपये कर दी गई है।
- इसी तरह, योग अध्ययन डिप्लोमा के लिए अब 21,300 रुपये के बजाय 26,625 रुपये और टूरिस्ट गाइड डिप्लोमा के लिए 10,300 रुपये के स्थान पर 12,875 रुपये फीस देनी होगी।
आगे की रणनीति पर एबीवीपी की चेतावनी
एबीवीपी के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। कुणाल गंगटा ने साफ शब्दों में कहा है कि विश्वविद्यालय का यह फैसला छात्रों की कमर तोड़ने वाला है। हालांकि महंगाई के कारण संस्थानों का संचालन खर्च बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन इतनी भारी मात्रा में शुल्क वृद्धि छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ है। पिछले छह दिनों से जारी भूख हड़ताल केवल एक शुरुआत है। यदि सरकार और प्रशासन ने जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो इस आंदोलन को और अधिक उग्र बनाया जाएगा। छात्र संगठन ने मांग की है कि विश्वविद्यालय प्रशासन को विद्यार्थियों के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए फीस वृद्धि के इस तुगलकी फरमान को तत्काल प्रभाव से रद्द करना चाहिए। फिलहाल, शिमला स्थित विश्वविद्यालय परिसर में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और छात्रों का समर्थन लगातार बढ़ता जा रहा है।
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