करनाल और जींद समेत हरियाणा के पांच जिले एनसीआर से बाहर क्यों होना चाहते हैं? हरियाणा एक महीने पहले 34
दिल्ली के विज्ञान भवन में 42वीं एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठक में हरियाणा के करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी को एनसीआर से बाहर करने पर फैसला संभव है। प्रस्ताव मंजूर हुआ तो हरियाणा का 60 प्रतिशत हिस्सा एनसीआर से बाहर हो जाएगा।

दिल्ली में आज 42वीं एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की अहम बैठक होने जा रही है, जिसमें दिल्ली एनसीआर के दायरे को लेकर बड़ा फैसला लिया जा सकता है। माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव से हरियाणा के कई जिले बाहर हो सकते हैं। दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में सुबह 11 बजे यह बैठक शुरू हो चुकी है, जिसमें मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर भी मौजूद हैं।

किन जिलों को बाहर करने की तैयारी

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक करनाल, जींद, महेंद्रगढ़, भिवानी और चरखी दादरी को एनसीआर क्षेत्र से बाहर करने की तैयारी चल रही है। माना जा रहा है कि दिल्ली एनसीआर में सिर्फ 100 किलोमीटर का दायरा ही शामिल रखा जाएगा।

दरअसल, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इससे पहले एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की बैठकों में यह मुद्दा उठाया था। उनका तर्क था कि दिल्ली से काफी दूर बसे जिलों को एनसीआर में शामिल नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे व्यावहारिक चुनौतियां सामने आती हैं। उन्होंने विधानसभा में भी यह बात रखते हुए कहा था कि एनसीआर के पूरे ढांचे की समीक्षा होनी चाहिए।

हरियाणा की मांग और इसका असर

फिलहाल हरियाणा का कहना है कि एनसीआर की सीमा से सटी तहसीलों को ही इस दायरे में रखा जाना चाहिए। अगर राज्य सरकार के इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो एनसीआर से हरियाणा का 60 प्रतिशत हिस्सा बाहर हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि मौजूदा समय में हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद और सोनीपत समेत कुल 14 जिले एनसीआर में शामिल हैं।

घट जाएगा एनसीआर का दायरा

इस समय हरियाणा का कुल 25 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र एनसीआर में आता है। अगर नया फॉर्मूला लागू होता है तो फिर केवल 10.5 हजार वर्ग किलोमीटर हिस्सा ही एनसीआर में रह जाएगा। इस बीच सबकी निगाहें रीजनल प्लान-2041 से जुड़ी बैठक पर टिकी हुई हैं।

एनसीआर से बाहर क्यों होना चाहता है हरियाणा

गौरतलब है कि दिल्ली एनसीआर को लेकर कुछ तय नियम लागू हैं, जो हरियाणा पर भी लागू होते हैं। इनमें कई ऐसे प्रतिबंध हैं, जिनसे परेशानी होती है। वायु प्रदूषण को लेकर दिल्ली एनसीआर में लगने वाली पाबंदियों का असर करनाल तक दिखाई देता है। ऐसे में निर्माण और उद्योग से लेकर कई आर्थिक गतिविधियों पर सीधा प्रभाव पड़ता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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