स्वास्थ्य
2 घंटे पहले
3
विचारों
सरकार और गायत्री परिवार का ऐतिहासिक समझौता
भारत सरकार ने देश की युवा पीढ़ी को मादक पदार्थों की लत से बचाने और उन्हें एक स्वस्थ भविष्य देने के लिए एक निर्णायक पहल की है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने भारत को नशामुक्त बनाने के अपने मिशन को गति देने के लिए प्रतिष्ठित आध्यात्मिक संस्था अखिल विश्व गायत्री परिवार के साथ एक रणनीतिक गठबंधन किया है। इस साझेदारी का मुख्य ध्येय देश के हर कोने तक नशा विरोधी जनजागरण फैलाना है, ताकि करोड़ों लोगों को नशे के घातक परिणामों से बचाया जा सके।
हरिद्वार में हुआ नशा मुक्त भारत सप्ताह का समापन
विश्व मादक द्रव्य दुरुपयोग एवं अवैध तस्करी निरोधक दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित नशा मुक्त भारत सप्ताह का समापन शुक्रवार को हरिद्वार स्थित देवसंस्कृति विश्वविद्यालय में हुआ। इस कार्यक्रम के दौरान, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय और गायत्री परिवार के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत, दोनों पक्ष मिलकर मादक द्रव्यों की तस्करी और उनके सेवन को रोकने के लिए देशव्यापी स्तर पर व्यापक जागरूकता अभियान चलाएंगे। इस अवसर पर दो हजार से भी अधिक स्वयंसेवकों और साधकों ने नशे के खिलाफ बिगुल फूंकते हुए एक विशाल जनजागरण रैली में भाग लिया। रैली में विद्यार्थियों, युवाओं और महिलाओं समेत विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने बड़ी संख्या में शिरकत की और एक नशामुक्त समाज के निर्माण का संकल्प लिया।
सामूहिक जन-आंदोलन की आवश्यकता
सरकार का स्पष्ट मानना है कि केवल सरकारी नीतियों और कानूनी सख्ती से नशे जैसी सामाजिक कुरीति का खात्मा नहीं किया जा सकता है। इसके लिए एक बड़े जन-आंदोलन की जरूरत है, जिसमें नैतिक शिक्षा और संस्कारों का समावेश हो। गायत्री परिवार की ओर से दी जाने वाली नैतिक शिक्षा इस पूरे अभियान की नींव का काम करेगी। नशे की लत न केवल एक व्यक्ति के स्वास्थ्य को बर्बाद करती है, बल्कि यह पूरे परिवार की खुशियों और देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी एक बड़ा खतरा है। सरकार और गायत्री परिवार का यह संयुक्त प्रयास युवाओं को व्यसनों की दलदल से बाहर निकालकर राष्ट्र निर्माण की राह पर अग्रसर करने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगा।
मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार का संदेश
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेन्द्र कुमार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि नशा समाज को अंदर से खोखला कर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बुराई को जड़ से मिटाने के लिए सरकारी प्रयासों के साथ-साथ समाज की आध्यात्मिक और सामाजिक संस्थाओं की सक्रिय भूमिका अत्यंत अनिवार्य है। उन्होंने उम्मीद जताई कि गायत्री परिवार के साथ हुआ यह एमओयू नशामुक्त भारत के लक्ष्य को जन-जन तक ले जाने में काफी प्रभावी साबित होगा।
आत्मविश्वास से होगा नशे का अंत
देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि नशा मुक्ति की असली शुरुआत व्यक्ति के भीतर आत्मविश्वास जगाने से होती है। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध संस्कृति हमें संयम, सदाचार और अनुशासन का संदेश देती है। आज हम सभी की यह सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि हम उन करोड़ों लोगों को सही राह दिखाएं जो व्यसन के चंगुल में फंसे हुए हैं। उन्होंने उपस्थित लोगों से आह्वान किया कि वे स्वयं तो नशा न करें ही, साथ ही कम से कम एक अन्य व्यक्ति को भी व्यसन छोड़ने के लिए प्रेरित करें। कार्यक्रम के दौरान परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने भी दुर्व्यसन से दूर रहने के लिए एक सशक्त अपील की।
Comments
0 comment