राजस्थान भाजपा में राजनीतिक नियुक्तियों की सुगबुगाहट तेज, 110 बोर्ड और आयोगों में नए चेहरों को मिल सकती है जिम्मेदारी राजस्थान एक महीने पहले 59
राजस्थान में लंबे समय से अटकी 110 से अधिक बोर्ड और आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियों की प्रक्रिया अब गति पकड़ती दिख रही है। भाजपा ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है, जबकि विपक्षी दल कांग्रेस ने इस देरी पर निशाना साधा है।

नियुक्तियों का इंतजार खत्म होने की उम्मीद

राजस्थान की राजनीति में इन दिनों बोर्ड और आयोगों में खाली पड़े पदों को भरने की चर्चा जोरों पर है। राज्य में कुल 110 से ज्यादा बोर्ड और आयोग हैं, जिनमें राजनीतिक नियुक्तियां की जानी हैं। सत्ता के गलियारों में माना जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी सरकार बहुत जल्द इन पदों पर अपने नेताओं को समायोजित कर सकती है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने संकेत दिए हैं कि पार्टी ने इन नियुक्तियों को लेकर अपनी पूरी तैयारी कर ली है और अब जल्द ही कोई ठोस फैसला सामने आ सकता है।

संगठन को मजबूती देने की रणनीति

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार का मुख्य उद्देश्य सामाजिक और संगठनात्मक संतुलन बनाना है। राजस्थान में आने वाले समय में पंचायत और निकाय चुनाव होने हैं, जिसे ध्यान में रखते हुए सरकार पार्टी के सक्रिय और समर्पित कार्यकर्ताओं को इन पदों पर जिम्मेदारी सौंप सकती है। इस कदम के जरिए न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने की कोशिश होगी, बल्कि संगठन को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत बनाया जाएगा। चुनाव से पहले यह नियुक्तियां पार्टी के लिए काफी महत्वपूर्ण साबित हो सकती हैं।

विपक्ष ने उठाए सवाल

जहां एक ओर भाजपा नियुक्तियों की तैयारी में जुटी है, वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि इतने लंबे समय तक इन पदों को खाली रखना सरकार की प्रशासनिक सुस्ती को दर्शाता है। इसके अलावा, कांग्रेस ने नियुक्तियों की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और देरी के कारणों को लेकर भी निशाना साधा है। हालांकि, सत्तारूढ़ दल के नेता इसे प्रक्रिया का हिस्सा बताकर नजरअंदाज कर रहे हैं।

चुनावों के नजरिए से अहम

राज्य में आगामी पंचायत और निकाय चुनाव के प्रस्तावित होने के कारण, हर राजनीतिक दल अपनी बिसात बिछाने में लगा है। बोर्ड और आयोगों की नियुक्तियां केवल सरकारी कामकाज चलाने का माध्यम नहीं, बल्कि चुनाव में वोट बैंक साधने और अपने समर्थकों को सक्रिय रखने का एक बड़ा जरिया मानी जाती हैं। अब देखना यह होगा कि भाजपा किन चेहरों को इन 110 बोर्डों में जगह देती है और इससे राज्य की राजनीति में क्या नया मोड़ आता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप