उत्तर प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
हनुमान जी पर की टिप्पणी से बढ़ा विवाद
राष्ट्रीय शोषित समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य अपने बयानों के कारण एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार उन्होंने गाजीपुर से भगवान राम और बजरंगबली को लेकर ऐसी टिप्पणी की है, जिसने राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। मौर्य ने सोशल मीडिया का सहारा लेते हुए भगवान हनुमान के जन्म से जुड़ी कथाओं पर सवाल खड़े किए हैं, जिसे लेकर विभिन्न संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है।
स्वामी प्रसाद मौर्य का तर्क और सवाल
सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट के जरिए स्वामी प्रसाद मौर्य ने तथागत बुद्ध के संदेश का हवाला देते हुए लिखा कि 'पहले जानो, फिर मानो'। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बिना किसी सवाल के हर बात को सच मानने का दबाव बनाते हैं। अपने बयान को विस्तार देते हुए उन्होंने हनुमान जी द्वारा सूर्य को निगलने की पौराणिक कथा पर प्रश्न उठाया। मौर्य ने तर्क दिया कि भगवान राम और हनुमान जी ने इसी धरती पर जन्म लिया था, जो धरती पर पैदा हुआ है, उसका अंत भी यहीं होगा। उन्होंने सवाल किया कि सूर्य पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है, तो पृथ्वी पर पैदा हुआ एक छोटा सा बंदर भला सूर्य को कैसे निगल सकता है? उन्होंने इसे अज्ञानता करार देते हुए कहा कि इसी अज्ञानता को दूर करने के लिए शिक्षा की आवश्यकता है।
धार्मिक संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया
मौर्य के इस बयान के बाद हिंदूवादी संगठनों में भारी आक्रोश है। अखिल भारत हिंदू महासभा के प्रवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने स्वामी प्रसाद मौर्य पर सनातन धर्म का निरंतर अपमान करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह कोई पहली बार नहीं है जब मौर्य ने इस तरह की भाषा का प्रयोग किया है। इससे पहले भी वे रामचरितमानस और प्रभु श्रीराम पर टिप्पणी कर चुके हैं। चतुर्वेदी ने सवाल किया कि स्वामी प्रसाद मौर्य हमेशा सनातन धर्म को ही निशाना क्यों बनाते हैं और अन्य धर्मों पर टिप्पणी करने का साहस क्यों नहीं जुटा पाते? उन्होंने यह भी कहा कि पूर्व में दी गई शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होने के कारण उनके हौसले बुलंद हैं और वे लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं।
विशेषज्ञों की राय
वरिष्ठ पत्रकार विजय उपाध्याय का मानना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य केवल अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाए रखने और चर्चा में बने रहने के लिए ऐसी बयानबाजी का सहारा लेते हैं। उपाध्याय के अनुसार, मौर्य को न तो बौद्ध दर्शन की गहरी समझ है और न ही सनातन परंपरा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सनातन धर्म में शास्त्रार्थ, अलग-अलग व्याख्याओं और समय के साथ सुधार की एक समृद्ध परंपरा रही है। पौराणिक कथाओं को केवल शाब्दिक रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि उनमें गहरे दार्शनिक और प्रतीकात्मक अर्थ छिपे होते हैं। उन्होंने भी इस बात पर जोर दिया कि स्वामी प्रसाद अन्य धर्मों के मामलों में बोलने से बचते हैं और केवल हिंदू धर्म को ही टारगेट करते हैं।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता दीपक रंजन ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य की आस्था समय और स्थितियों के अनुसार बदलती रहती है। वे कभी किसी के पक्ष में तो कभी विपक्ष में बोलने लगते हैं। रंजन ने कहा कि ऐसे बयानों को बहुत अधिक गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उन पर ज्यादा ध्यान देने से अनावश्यक विवाद पैदा होता है।
विवादों से पुराना नाता
गौरतलब है कि यह पहला अवसर नहीं है जब स्वामी प्रसाद मौर्य किसी विवाद में घिरे हों। वे अतीत में भी रामचरितमानस को लेकर दिए गए बयानों और सनातन धर्म पर की गई टिप्पणी के कारण सुर्खियों में रहे हैं। उनकी ताजा टिप्पणी ने एक बार फिर आस्था और तर्क के बीच बहस छेड़ दी है। धार्मिक संगठनों ने इसे करोड़ों लोगों की भावनाओं का अपमान बताते हुए मौर्य के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि इस मामले पर आगे क्या कार्रवाई होती है और मौर्य का अगला कदम क्या होता है।
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