राष्ट्रीय राजनीति
2 महीने पहले
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विचारों
राम मंदिर ट्रस्ट में इस्तीफों की गूंज
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद से ही केंद्र सरकार और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार के सूत्रों के अनुसार, इन दोनों पदाधिकारियों ने नैतिक आधार पर अपने पदों से इस्तीफा दिया है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब विपक्षी दल सरकार पर तीखे हमले कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि केवल इस्तीफे से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरे ट्रस्ट को ही भंग कर दिया जाना चाहिए।
विपक्ष का हमला: बड़ी मछली को बचाने का आरोप
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने इस इस्तीफे पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चंपत राय के पद छोड़ने से इस पूरे विवाद का समाधान नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा कि पहले से ही एक एसआईटी का गठन किया गया था जिसने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी है। एसआईटी ने हालांकि कुछ छोटे स्तर के लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन असली दोषियों तक अभी जांच नहीं पहुंची है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरे ट्रस्ट को तुरंत भंग कर देना चाहिए। राउत ने याद दिलाया कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने ही सबसे पहले इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था जिसके कारण यह पूरा घोटाला प्रकाश में आया।
हजारों करोड़ के घोटाले का संदेह
कांग्रेस के राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने इस घटनाक्रम को महज एक शुरुआत बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह घोटाला सैकड़ों या हजारों करोड़ रुपए का है, तो क्या सारा पैसा केवल चंपत राय के पास ही गया? उन्होंने कहा कि यह एक बहुत बड़ा मामला है और इस्तीफे से यह जांच समाप्त नहीं हो सकती। उन्हें लगता है कि इस धांधली में कई अन्य प्रभावशाली लोग शामिल हो सकते हैं, जिनकी पहचान होना अभी बाकी है।
चंदा वसूली पर राजनीतिक आरोप
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के प्रवक्ता शक्ति यादव ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को घेरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्तीफों का यह सिलसिला असल में मुख्य दोषियों यानी बड़ी मछली को बचाने की एक सोची-समझी कोशिश है। उन्होंने दावा किया कि अगर जांच सही दिशा में आगे बढ़ती है और बड़े चेहरों तक पहुंचती है, तो कई चौंकाने वाले नाम सामने आएंगे। शक्ति यादव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम के नाम का सहारा लेकर चंदे का बड़ा खेल खेला गया है। उन्होंने इन लोगों पर धर्म की आड़ में चंदा खाने और खिलाने का गंभीर आरोप भी लगाया।
जांच और कानूनी प्रक्रिया
गौरतलब है कि राम मंदिर में वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायतें मिलने के बाद ट्रस्ट ने खुद विशेष जांच का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्पष्ट निर्देशों के बाद 13 जून को एक एसआईटी का गठन किया गया था। इस मामले में अब तक कुल आठ लोगों को पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज होने के बाद गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ट्रस्ट के कुछ कर्मचारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सैकड़ों करोड़ रुपयों में धांधली की। वर्तमान में यह मामला न केवल कानूनी जांच का विषय बना हुआ है, बल्कि आगामी समय में राजनीतिक बहस का मुख्य मुद्दा भी बना रहेगा।
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