मेडिकल स्टोर्स के लिए केंद्र सरकार के सख्त नियम: अब CCTV कैमरे की निगरानी में बिकेगी दवाएं राष्ट्रीय राजनीति एक घंटा पहले 6
केंद्र सरकार देश भर के मेडिकल स्टोर्स को लेकर नया नियम ला रही है, जिसके तहत सीसीटीवी कैमरे लगवाना और दवाओं की बिक्री का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य होगा। बिना डॉक्टर की पर्ची के दवा बेचना अब मुश्किल होगा और सरकार ने इस प्रस्ताव पर लोगों से सुझाव मांगे हैं।

दवा दुकानों पर सरकार की पैनी नजर

केंद्र सरकार देश भर में संचालित मेडिकल स्टोर्स और फार्मेसी दुकानों के कामकाज को व्यवस्थित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। स्वास्थ्य सेवाओं को सुरक्षित बनाने और दवाओं की मनमानी बिक्री पर रोक लगाने के लिए सरकार अब बेहद सख्त नियमों का खाका तैयार कर रही है। इन नए नियमों के प्रभावी होने के बाद देश के सभी मेडिकल स्टोर्स सरकार की निगरानी में होंगे। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दवाओं की बिक्री पूरी तरह से पारदर्शी और नियमानुसार हो।

सीईटीवी कैमरों से होगी मॉनिटरिंग

नए प्रस्तावित नियमों के अनुसार, हर मेडिकल स्टोर के संचालक के लिए अपनी दुकान में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। ये कैमरे दुकान के अंदर होने वाली हर गतिविधि पर 24 घंटे नजर रखेंगे। सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को महज औपचारिकता के लिए नहीं रखा जाएगा, बल्कि इस डेटा को कम से कम 3 महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। इससे जरूरत पड़ने पर दवाओं की बिक्री के रिकॉर्ड का सत्यापन किया जा सकेगा और किसी भी अनैतिक गतिविधि को पकड़ा जा सकेगा।

बिना पर्ची दवाओं की बिक्री पर रोक

लंबे समय से यह समस्या बनी हुई है कि कई मेडिकल स्टोर्स बिना किसी वैध डॉक्टर की पर्ची यानी प्रिस्क्रिप्शन के ही दवाएं बेच देते हैं। इससे मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ होने का जोखिम बना रहता है। सरकार इस पूरी प्रक्रिया को पूरी तरह से बंद करना चाहती है। अब नियम यह होगा कि कोई भी दुकानदार बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के दवाएं नहीं बेच पाएगा। सीसीटीवी की निगरानी से इस बात की जवाबदेही तय होगी कि दवा केवल डॉक्टर की सलाह के बाद ही मरीज तक पहुंचे।

ड्राफ्ट पर मांगी गई है राय

केंद्र सरकार ने इस योजना का एक विस्तृत ड्राफ्ट तैयार कर लिया है और इसे सार्वजनिक सूचना के लिए जारी कर दिया है। सरकार की मंशा इस मामले में पूरी तरह स्पष्ट है कि किसी भी कड़े कदम को लागू करने से पहले जनता की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। सरकार ने आम लोगों, जानकारों और संबंधित पक्षकारों से इस मसौदे पर अपने सुझाव और आपत्तियां दर्ज कराने को कहा है। इस प्रक्रिया के लिए 30 दिनों का समय निर्धारित किया गया है। 30 दिन की समय सीमा समाप्त होने के बाद ही सरकार इस पर अंतिम निर्णय लेगी और नियमों को आधिकारिक रूप से लागू किया जाएगा।

सुधार और पारदर्शिता की उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि इन कड़े नियमों के लागू होने के बाद मेडिकल स्टोर संचालकों की जिम्मेदारी काफी बढ़ जाएगी। पारदर्शिता आने से नकली दवाओं या गलत दवाओं के वितरण पर भी लगाम लगेगी। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा आम जनता को मिलेगा, जिन्हें सुरक्षित और सही दवाएं मिलने का भरोसा बढ़ेगा। इसके अलावा, दवाओं के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए निगरानी का स्तर इतना ऊंचा होगा कि मनमानी करने वाले दुकानदारों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। आने वाले समय में स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में दवाओं के कारोबार का पूरा ढांचा और भी अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनेगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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