भारत
एक दिन पहले
13
विचारों
बैंक मैनेजर से विवाद और हाथापाई
तमिलनाडु के राजनीति के दिग्गज चेहरे और राज्य के मुख्यमंत्री रहे एम. करुणानिधि की पोती कयलविझी अझागिरी एक गंभीर कानूनी विवाद में फंस गई हैं। कयलविझी, जो पूर्व केंद्रीय मंत्री एम.के. अझागिरी की बेटी हैं, पर चेन्नई में एक बैंक मैनेजर को थप्पड़ मारने और उन्हें डराने-धमकाने का आरोप लगा है। अडयार पुलिस ने इस मामले में कयलविझी के खिलाफ औपचारिक रूप से मुकदमा दर्ज कर लिया है। विवाद की जड़ चेन्नई के अडयार इलाके में स्थित एक कमर्शियल इमारत में मौजूद स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की एनआरआई ब्रांच है। यह संपत्ति कयलविझी अझागिरी के स्वामित्व में है, जहां बैंक का कार्यालय संचालित होता है।
लिफ्ट की खराबी बनी विवाद की वजह
विवाद की शुरुआत तब हुई जब बैंक मैनेजर हर्षिन सिंह ने बिल्डिंग की लिफ्ट में आ रही तकनीकी खराबी को लेकर प्रबंधन से शिकायत की। जब मेंटेनेंस करने वाले व्यक्ति द्वारा समस्या का उचित समाधान नहीं किया गया, तो मैनेजर ने इसकी सीधी शिकायत प्रॉपर्टी मालकिन कयलविझी अझागिरी तक पहुंचाई। इस मुद्दे को सुलझाने के बजाय, 20 जुलाई को जब कयलविझी बैंक पहुंचीं, तो वहां तनाव बढ़ गया। बैंक मैनेजर हर्षिन सिंह के साथ उनकी तीखी बहस हुई और देखते ही देखते कयलविझी ने मैनेजर को सबके सामने थप्पड़ जड़ दिया। वहां मौजूद सुरक्षा कैमरों में यह पूरी शर्मनाक घटना कैद हो गई।
पुलिस तक पहुंची शिकायत और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
इस घटना के तुरंत बाद, मैनेजर ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जानकारी दी और सीसीटीवी फुटेज उन्हें सौंपा। बैंक की एनआरआई शाखा के चीफ मैनेजर नामाशिवायम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अडयार पुलिस स्टेशन में कयलविझी के खिलाफ लिखित शिकायत दी। शनिवार को जैसे ही बैंक के अंदर का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर सार्वजनिक हुआ और वायरल हुआ, पुलिस ने मामले में सक्रियता दिखाते हुए कयलविझी के विरुद्ध मारपीट और धमकी देने की धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी।
एम. करुणानिधि का राजनीतिक सफर
आरोपी महिला के दादा, एम. करुणानिधि, भारतीय राजनीति का एक बड़ा नाम रहे हैं। 3 जून 1924 से 7 अगस्त 2018 तक फैले जीवनकाल में करुणानिधि तमिलनाडु के पांच बार मुख्यमंत्री बने। उन्हें उनके समर्थक 'कलाईनार' के नाम से संबोधित करते थे। द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम (DMK) पार्टी के नेतृत्व के दौरान उन्होंने करीब 60 साल तक राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई और अपने करियर में उन्होंने एक भी चुनाव नहीं हारा। राजनीति से जुड़ने से पहले वे एक सफल तमिल पटकथा और संवाद लेखक के रूप में जाने जाते थे, जिन्होंने अपनी कलम के जरिए द्रविड़ आंदोलन की विचारधारा को जन-जन तक पहुंचाया था।
Comments
0 comment