झारखंड
2 घंटे पहले
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झारखंड में कृषि और पशुपालन की नई राह
झारखंड की राजधानी रांची के मोराबादी मैदान में हाल ही में संपन्न हुए तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेले ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने का काम किया है। इस मेले का मुख्य उद्देश्य किसानों और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को आधुनिक कृषि और पशुपालन तकनीकों से परिचित कराना था। विशेषज्ञों ने यहां स्वरोजगार के ऐसे रास्ते सुझाए हैं, जो कम खर्च में ज्यादा मुनाफा देने में सक्षम हैं। इसी क्रम में बरपोखर महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी ने मुर्गी पालन का एक बेहद उन्नत मॉडल पेश किया है।
बीबी-300 लेयर बर्ड: कम लागत में अधिक लाभ
बरपोखर महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के प्रतिनिधि आशीष कुमार ने बताया कि उनकी संस्था राज्य के सभी 24 जिलों में 100 लेयर बर्ड मॉडल के तहत काम कर रही है। यह केज सिस्टम पर आधारित है, जिसे वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत लाभुकों और महिला स्वयं सहायता समूहों को मुर्गी पालन के जरिए आत्मनिर्भर बनाना है। इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें शुरू से लेकर अंत तक तकनीकी सहयोग मिलता है, जिससे नए लोगों को किसी तरह की दिक्कत नहीं होती है।
योजना की लागत और सुविधाएं
इस मुर्गी पालन परियोजना की कुल लागत लगभग 1 लाख 20 हजार रुपये तय की गई है। इस बजट में लाभार्थी को वे सभी जरूरी संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, जो व्यवसाय शुरू करने के लिए अनिवार्य हैं। इसमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- बीबी-300 लेयर बर्ड्स की खेप।
- मुर्गियों के रहने के लिए आधुनिक केज सिस्टम और शेड।
- शुरुआती एक महीने का दाना यानी फीड।
- मुर्गियों की सेहत के लिए जरूरी दवाइयां।
कंपनी सिर्फ संसाधन ही मुहैया नहीं कराती, बल्कि लाभार्थियों को उचित प्रशिक्षण और नियमित तकनीकी सलाह भी देती है। जरूरत पड़ने पर वेटरनरी डॉक्टर की सहायता भी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे व्यवसाय में जोखिम कम हो जाता है।
अंडा उत्पादन की अद्भुत क्षमता
विशेषज्ञों के मुताबिक, बीबी-300 लेयर मुर्गी व्यावसायिक अंडा उत्पादन के लिए ही विकसित की गई है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह लगभग 24 महीने तक लगातार प्रतिदिन 1 अंडा देने में सक्षम है। चूहों को पहले 90 दिनों तक विशेष ब्रूडिंग प्रक्रिया के तहत रखा जाता है। इसके बाद इन्हें संबंधित जिले में भेजा जाता है। वहां पहुंचने के बाद, 25 से 30 दिनों तक मुर्गियां स्थानीय माहौल में ढल जाती हैं और फिर अंडा उत्पादन शुरू कर देती हैं। सबसे अच्छी बात यह है कि इस मॉडल में अंडा प्राप्त करने के लिए मुर्गे की आवश्यकता नहीं होती, जिससे पालन और दाने का खर्च काफी कम हो जाता है।
ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का जरिया
यह मॉडल कम जगह और कम देखभाल की मांग करता है, इसलिए यह घर की महिलाओं के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरा है। इस व्यवसाय को अपनाकर महिलाएं हर महीने लगभग 15 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आय अर्जित कर सकती हैं। यह पहल ग्रामीण इलाकों में महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और परिवारों की माली हालत सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
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