बुरहानपुर की अनोखी मावा जलेबी: स्वाद ऐसा कि सात दिन तक नहीं होती खराब, विदेशों में भी है जबरदस्त डिमांड मध्य प्रदेश एक महीने पहले 68
मध्य प्रदेश के बुरहानपुर की प्रसिद्ध मावा जलेबी अपनी लंबी आयु और लाजवाब स्वाद के लिए जानी जाती है। यह खास मिठाई न केवल देश में बल्कि विदेशों में भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है।

स्वाद का ऐसा जादू कि सात दिन तक रहती है ताजी

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में स्थित जलेबी बाजार इन दिनों अपनी एक बेहद खास मिठाई के लिए सुर्खियों में है। यहाँ मिलने वाली मावा जलेबी का स्वाद देश की सीमाओं को पार कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है। इस जलेबी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बिना खराब हुए पूरे एक सप्ताह तक चल सकती है। अपनी इसी अनूठी विशेषता के कारण यह न केवल स्थानीय लोगों की पसंद है, बल्कि यहां आने वाले विदेशी पर्यटक भी इसे खूब चाव से खाते हैं और साथ लेकर जाते हैं।

बाजार का इतिहास और बनावट

बुरहानपुर का यह प्रसिद्ध जलेबी बाजार बहुत ही सघन और ऐतिहासिक है। शहर के हृदय स्थल में बसा यह बाजार मात्र 300 मीटर के दायरे में सीमित है, लेकिन इसकी महक दूर-दूर तक फैली हुई है। इस छोटे से क्षेत्र में एक दर्जन से भी अधिक जलेबी की दुकानें सजी हुई हैं, जहां सुबह होते ही खरीदारों का तांता लग जाता है। यहाँ के दुकानदार हारून खान बताते हैं कि यह क्षेत्र शहर के सबसे पुराने बाजारों में से एक है, जहां पीढ़ियों से जलेबी बनाने की परंपरा निभाई जा रही है।

क्या है स्वाद का राज

इस जलेबी के बेमिसाल स्वाद के पीछे की मुख्य वजह इसमें इस्तेमाल की जाने वाली सामग्री है। इसे शुद्ध मावे और आरारोट के मिश्रण से तैयार किया जाता है। यही खास अनुपात इसे सामान्य जलेबियों से अलग बनाता है। बाजार में इन जलेबियों की कीमत ₹200 प्रति किलो से लेकर ₹320 प्रति किलो तक तय की गई है। गुणवत्ता और स्वाद के मामले में कोई समझौता न करने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ती जा रही है।

विदेशों तक जाती है मांग

इस मिठाई की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पर्यटक इसे केवल यहाँ खाकर ही संतुष्ट नहीं होते, बल्कि भारी मात्रा में पैक करवाकर अपने साथ विदेशों तक ले जाते हैं। इसकी टिकाऊ क्षमता इतनी अधिक है कि यदि इसे फ्रिज में रखा जाए, तो यह दो से तीन दिनों तक अपना स्वाद बिल्कुल नहीं खोती। लोग इसे एक सप्ताह तक आराम से इस्तेमाल कर सकते हैं। अपनी इसी अनूठी खूबियों के कारण, अब प्रशासन और स्थानीय लोग इसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए इसे GI Tag दिलाने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। बुरहानपुर की यह मावा जलेबी अब क्षेत्र की एक प्रमुख सांस्कृतिक और खाद्य धरोहर के रूप में उभर चुकी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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