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2 घंटे पहले
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हिंदी सिनेमा में आमिर खान को बरसों से 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' के नाम से पुकारा जाता रहा है। उनकी फिल्मों और काम करने के तरीके से प्रभावित होकर प्रशंसकों ने उन्हें यह पहचान दी है। लेकिन निर्देशक विक्रम भट्ट इस लोकप्रिय टैग को कुछ अलग ढंग से देखते हैं। उनका कहना है कि आमिर असल में परफेक्शनिस्ट नहीं, बल्कि ऐसे कलाकार हैं जो हर बार अपने काम को पहले से बेहतर करने की धुन में रहते हैं।
परफेक्शनिस्ट टैग से असहमति
हाल ही में हुई एक बातचीत में विक्रम भट्ट ने साफ कहा कि वह आमिर को परफेक्शनिस्ट कहे जाने से पूरी तरह सहमत नहीं हैं। उनके अनुसार, सच्चा परफेक्शनिस्ट वह होता है जो यह मान बैठे कि उसने सबसे बेहतरीन काम कर लिया है और अब इससे आगे कुछ संभव नहीं है।
भट्ट के मुताबिक आमिर खान की सोच इसके ठीक उलट है। आमिर कभी यह स्वीकार नहीं करते कि उनका काम पूरी तरह पूरा या परफेक्ट हो चुका है। वह हमेशा यही सोचते रहते हैं कि इसे और बेहतर किस तरह बनाया जाए। यही बात उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग कर देती है, क्योंकि वह अपने काम से जल्दी संतुष्ट नहीं होते और निरंतर सुधार की कोशिश में लगे रहते हैं।
बेस्ट देना और परफेक्ट मानना अलग बातें
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए निर्देशक ने कहा कि अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करना और खुद को परफेक्ट मान लेना, दोनों बिल्कुल अलग चीजें हैं। आमिर हमेशा यह मानकर चलते हैं कि अभी और मेहनत की गुंजाइश बाकी है। वह अपने हर प्रोजेक्ट में पूरा समय और ऊर्जा लगाते हैं, जिसका असर उनकी फिल्मों की गुणवत्ता में साफ झलकता है।
'गुलाम' के दिनों की यादें
बातचीत के दौरान विक्रम भट्ट ने फिल्म 'गुलाम' के दौर को भी याद किया, जिसमें उन्होंने आमिर खान के साथ काम किया था। उन्होंने बताया कि शूटिंग के समय कई बार किसी सीन या फैसले को लेकर दोनों के बीच मतभेद भी हो जाते थे। हालांकि इन बहसों का मकसद एक-दूसरे को गलत ठहराना नहीं, बल्कि फिल्म को और बेहतर बनाना होता था।
भट्ट के अनुसार आमिर हर चीज को गहराई से समझना चाहते हैं। अगर उन्हें लगता है कि किसी सीन में सुधार की जगह बची है, तो वह उस पर खुलकर चर्चा करते हैं। वह उन कलाकारों में से नहीं हैं जो सिर्फ अपना काम निपटाकर आगे बढ़ जाते हैं।
आमिर का करियर सफर
गौरतलब है कि आमिर खान ने भी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। उन्होंने मुंबई के नरसी कॉलेज से 12वीं पास की और इसके बाद पढ़ाई छोड़कर एक थिएटर कंपनी में काम करना शुरू कर दिया। फिल्म 'कयामत से कयामत तक' से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की और आज वह सुपरस्टार हैं।
'यह मेरी निजी राय है'
आखिर में निर्देशक ने यह भी जोड़ा कि यह उनकी निजी राय है और जरूरी नहीं कि आमिर खुद अपने बारे में ऐसा ही सोचते हों। लेकिन इतने वर्षों तक उनके साथ काम करने और करीब से देखने के बाद उनकी यही समझ बनी है कि आमिर खान एक ऐसे कलाकार हैं, जो लगातार सीखने, खुद को बेहतर बनाने और आगे बढ़ने में भरोसा रखते हैं।
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