पिता को बचपन में खोया, परिवार पालने के लिए चलाई बस की कंडक्टरी, फिर 'ऑनस्क्रीन मां' से रचाई शादी और बेटे संग बना यादगार रिश्ता मनोरंजन 3 महीने पहले 56
बंटवारे का दर्द झेलने और बस कंडक्टर जैसी नौकरियां करने के बाद इस दिग्गज अभिनेता ने फिल्मों में बड़ा मुकाम हासिल किया। पर्दे पर अपनी मां का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री से शादी और बेटे के साथ उनका अनोखा रिश्ता आज भी चर्चा में रहता है।

कुछ कलाकारों की असल जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं होती। संघर्ष से लेकर स्टारडम तक और निजी जिंदगी के भावुक पलों तक, हर मोड़ पर उनकी कहानी प्रेरणा देती है। ऐसे ही एक मशहूर अभिनेता थे सुनील दत्त, जिन्होंने देश के विभाजन की पीड़ा को करीब से देखा और छोटी-मोटी नौकरियां करते हुए अपने परिवार को संभाला।

संघर्ष से भरा शुरुआती जीवन

सुनील दत्त का जन्म 6 जून 1929 को पंजाब के झेलम जिले (जो अब पाकिस्तान में है) के खुर्द गांव में हुआ था। बचपन में ही उनके सिर से पिता का साया उठ गया, जिसकी वजह से उनके शुरुआती दिन कठिनाइयों में बीते। साल 1947 के विभाजन का दर्दनाक दौर झेलने के बाद उन्होंने घर चलाने के लिए बस कंडक्टर जैसी कई छोटी-मोटी नौकरियां कीं, लेकिन पढ़ाई और मेहनत से उन्होंने कभी मुंह नहीं मोड़ा।

रेडियो से फिल्मी पर्दे तक का सफर

अपने करियर की शुरुआत रेडियो से करने वाले सुनील दत्त ने साल 1955 में फिल्म 'रेलवे प्लेटफॉर्म' के जरिए बॉलीवुड में कदम रखा। इसके बाद साल 1957 में आई आइकॉनिक फिल्म 'मदर इंडिया' ने उनके करियर की दिशा पूरी तरह बदल दी और वे रातों-रात बड़े स्टार बन गए। इस फिल्म में निभाया गया उनके गुस्सैल बेटे 'बिरजू' का किरदार आज भी सिनेमा में मील का पत्थर माना जाता है।

सेट पर मिलीं जीवनसंगिनी

'मदर इंडिया' के सेट पर ही उनकी मुलाकात मशहूर अभिनेत्री नरगिस से हुई, जो आगे चलकर उनकी जीवनसंगिनी बनीं। दोनों की शादी के बाद उनके तीन बच्चे हुए- संजय, प्रिया और नम्रता।

उतार-चढ़ाव और शानदार वापसी

करियर में कई सुपरहिट फिल्में देने वाले सुनील दत्त की जिंदगी में भारी उतार-चढ़ाव भी आए। जब उनकी फिल्म 'रेशमा और शेरा' बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह नाकाम रही, तो वे कर्ज के भारी बोझ में दब गए। बावजूद इसके उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी कड़ी मेहनत के दम पर एक बार फिर जबरदस्त वापसी कर सबको हैरान कर दिया।

बाप-बेटे की सुपरहिट जोड़ी

जब 'मुन्ना भाई एमबीबीएस' में सुनील दत्त और संजय दत्त की जोड़ी पहली बार एक-साथ बड़े पर्दे पर नजर आई, तो यह दर्शकों के लिए बेहद भावुक और यादगार पल बन गया। शूटिंग के दौरान सुनील दत्त अक्सर जानबूझकर संजय के डायलॉग्स बदल देते थे, ताकि उनका बेटा हर सीन में कुछ नया सीखे और अपनी अदाकारी को और बेहतर बनाए।

इसी पर संजय दत्त सेट पर मजाक में कहा करते थे कि पापा के साथ शूटिंग करने का मतलब है हर टेक में एक नया एग्जाम देना। फिल्म से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा यह भी है कि जब किसी सीन को लेकर डायरेक्टर संजय दत्त को समझाते या डांटते थे, तो सुनील दत्त तुरंत बीच में आकर हंसते हुए कहते थे, 'घर पर मैं इसे पहले ही बहुत डांट देता हूं, अब आप लोग इसे सेट पर मत डांटिए।'

राजनीति में भी छोड़ी छाप

फिल्मों के साथ-साथ सुनील दत्त राजनीति में भी काफी सक्रिय रहे और कई बार सांसद चुने गए। साल 2005 में भले ही वे इस दुनिया को अलविदा कह गए, लेकिन अपनी बेहतरीन अदाकारी, जिंदादिली और अनोखे अंदाज के जरिए वे आज भी करोड़ों फैंस और सिनेमा प्रेमियों के दिलों में जिंदा हैं।

आन्या कपूर पाबना के मनोरंजन रिपोर्टर हैं, जो बॉलीवुड, ओटीटी और टेलीविजन की खबरें कवर करते हैं। फिल्मों, वेब सीरीज, सेलिब्रिटी और बॉक्स ऑफिस पर उनकी पैनी नजर रहती है। वे मनोरंजन जगत की हलचल को रोचक अंदाज में दर्शकों तक लाते हैं।

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