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एक घंटा पहले
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आशुतोष गोवारिकर के निर्देशन में बनी आमिर खान की मशहूर फिल्म 'लगान' की रिलीज को पूरे 25 साल बीत चुके हैं। इस फिल्म में कई कलाकार अहम भूमिकाओं में नजर आए थे, जिनमें रघुबीर यादव भी एक थे। उन्होंने इसमें भूरा का किरदार निभाया था। फिल्म की सिल्वर जुबली के इस मौके पर रघुबीर यादव ने शूटिंग के दौर की कई दिलचस्प यादें ताजा की हैं।
'लगान' की शूटिंग गुजरात के कच्छ जिले में हुई थी, जो अपनी कड़ी गर्मी के लिए मशहूर है। रघुबीर यादव ने एक इंटरव्यू में बताया कि सेट पर अनुशासन इतना कड़ा था कि समय पर न पहुंचने पर खुद आमिर खान को भी इसका सामना करना पड़ा और एक बार तो क्रू की बस उन्हें छोड़कर ही रवाना हो गई थी।
छह महीने की शूटिंग और परिवार जैसा माहौल
शूटिंग के दिनों को याद करते हुए रघुबीर यादव ने हंसते हुए कहा, 'मुझे सबसे पहले वहां की भयंकर गर्मी याद आती है। हम वहां जनवरी से जून तक, करीब 6 महीने रहे। धूप में झुलसकर हम सबका रंग टैन हो गया था। दूसरी बात यह कि वहां कभी लगा ही नहीं कि हम किसी फिल्म की शूटिंग कर रहे हैं। आमिर खान ने हम सबको इस तरह जोड़ा था कि हम एक परिवार बन गए थे। आजकल फिल्मों के सेट पर ऐसा तालमेल बहुत कम देखने को मिलता है। वहां कोई छोटा-बड़ा नहीं था, सबके साथ एक जैसा बर्ताव होता था।'
आमिर को छोड़कर समय पर निकल गई थी बस
रघुबीर यादव ने बताया कि 'लगान' के सेट पर अनुशासन के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाता था। उठने, खाने और सफर का समय एकदम तय रहता था। एक मजेदार किस्सा साझा करते हुए उन्होंने कहा, 'हम लोग रोज सुबह 4 बजे उठकर निकल जाते थे। क्रू की बस का समय बिल्कुल फिक्स था। जो कोई समय पर बस में नहीं बैठ पाता, उसे जैसे-तैसे खुद सेट पर पहुंचना पड़ता था, बस किसी का इंतजार नहीं करती थी। एक दिन खुद आमिर खान को थोड़ी देर हो गई। नियम सबके लिए बराबर थे, इसलिए आमिर के लिए कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं था और बस उन्हें लिए बिना ही समय पर रवाना हो गई। बाद में आमिर ने सिनेमैटोग्राफर अनिल मेहता से लिफ्ट मांगी और उनकी गाड़ी से सेट पर पहुंचे।'
देरी पर लगता था जुर्माना
एक पुराने इंटरव्यू में निर्देशक आशुतोष गोवारिकर खुद बता चुके हैं कि 'लगान' के सेट पर देर से आने वालों पर जुर्माना लगाया जाता था। जब रघुबीर यादव से पूछा गया कि क्या कभी उन्हें भी यह लेट फीस चुकानी पड़ी, तो उन्होंने जवाब दिया, 'नहीं-नहीं, मैं तो बच गया था। हां, आमिर खान पर जरूर जुर्माना लगा होगा। देर से आने पर कुछ पैसे काटे जाते थे, शायद 500 के आस-पास, उससे ज्यादा नहीं। लेकिन सच बताऊं तो उस नियम का मकसद पैसे वसूलना नहीं, बल्कि लेट आने वाले को सबके सामने शर्मिंदा करना था, क्योंकि फिर सेट पर हर किसी को पता चल जाता था कि भाई साहब आज लेट आए हैं।'
फूड पॉइजनिंग और अधूरा रह गया ऑपरेशन
रघुबीर यादव ने शूटिंग के दौरान का एक हैरान करने वाला किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि कैसे सेट पर अचानक उनकी तबीयत बिगड़ी और नौबत इमरजेंसी अपेंडिक्स सर्जरी तक पहुंच गई। उन्होंने कहा, 'वहां कच्छ में मुझे फूड पॉइजनिंग हो गई थी। हमारी यूनिट के लिए एक डॉक्टर हमेशा वहां तैनात रहता था, उसी ने मेरा अपेंडिक्स निकालने का फैसला किया। उस डॉक्टर के पास कोई नया मेडिकल इंस्ट्रूमेंट आया था, जिसे लेकर उसने दावा किया कि वह इसके जरिए महज 15 मिनट में मेरी दिक्कत दूर कर देगा। असल में वह डॉक्टर अपनी उस नई मशीन का रौब झाड़ना चाहता था, लेकिन चक्कर यह हुआ कि मेरे पेट में तीन कट लगाने के बाद भी ऑपरेशन नहीं कर पाया।'
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