कोडरमा के विकास की प्रेरणादायक कहानी, हेल्पर की नौकरी छोड़कर आज खुद खड़ा किया अचार का सफल कारोबार व्यापार 6 घंटे पहले 6
कोडरमा के झुमरी तिलैया में रहने वाले विकास कुमार ने कभी दूसरों के अचार स्टॉल पर हेल्पर के रूप में काम किया था, लेकिन आज वे खुद के सफल अचार कारोबार के मालिक हैं। उनकी मेहनत और राजस्थानी अचार की लोकप्रियता अब डिज्नीलैंड मेलों में लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

मेहनत से बदली किस्मत

झारखंड के कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया स्थित पूर्णिमा टॉकीज परिसर में लगने वाला डिज्नीलैंड मेला इन दिनों एक खास वजह से चर्चा में है। यहाँ राजस्थानी अचार का स्टॉल लगाने वाले विकास कुमार की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। विकास ने शून्य से शुरुआत की और आज वे एक सफल उद्यमी बन चुके हैं। उन्होंने अपनी लगन और मेहनत के दम पर यह साबित कर दिया है कि यदि व्यक्ति में कुछ कर गुजरने की इच्छा हो, तो कोई भी काम छोटा नहीं होता।

हेल्पर से मालिक तक का सफर

अपनी सफलता के बारे में बात करते हुए विकास कुमार ने बताया कि करीब 5 साल पहले तक उनकी स्थिति ऐसी नहीं थी। उस समय वे दूसरों के अचार स्टॉल पर एक साधारण हेल्पर के तौर पर काम करते थे। उस दौरान जो भी कमाई होती थी, उससे वे अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। हेल्पर के रूप में काम करते हुए उन्होंने अचार के बिजनेस की बारीकियों को बहुत करीब से समझा। उन्हें समझ आया कि किस तरह ग्राहकों को आकर्षित किया जाता है और गुणवत्ता का ख्याल कैसे रखा जाता है। यही अनुभव उनके अपने खुद के व्यवसाय की नींव बना। आज वे खुद के स्टॉल के मालिक हैं और गर्व के साथ अपना काम कर रहे हैं।

पूरे देश के मेलों में होती है पहुंच

विकास कुमार अब केवल कोडरमा तक ही सीमित नहीं हैं। वे अलग-अलग शहरों में आयोजित होने वाले डिज्नीलैंड मेलों में यात्रा करते हैं और अपना स्टॉल लगाते हैं। जहां भी डिज्नीलैंड मेला लगता है, विकास वहां पहुंच जाते हैं और ग्राहकों को बेहतरीन राजस्थानी स्वाद उपलब्ध कराते हैं। उनका यह घूम-घूमकर काम करने का तरीका न केवल उन्हें मुनाफा दे रहा है, बल्कि उन्हें एक नई पहचान भी दिला रहा है।

अचार की 28 वैरायटी और कीमतें

उनके स्टॉल पर अचार की एक लंबी श्रृंखला उपलब्ध है। विकास बताते हैं कि उनके पास कुल 28 प्रकार के अचार मौजूद हैं, जिनमें खट्टे, मीठे और तीखे हर तरह के स्वाद का ध्यान रखा गया है। ग्राहकों की सुविधा के लिए उन्होंने कीमतें भी काफी किफायती रखी हैं। उनके स्टॉल पर 250 ग्राम अचार की कीमत मात्र 80 रुपये है। यहां अदरक, करेला, आंवला और लाल मिर्च के अचार समेत कई तरह के विकल्प उपलब्ध हैं। इसके अलावा, मौसम के अनुसार सीजनल अचार भी खरीदारों को आकर्षित करते हैं।

बांस करेला और लहसुन की सबसे अधिक मांग

झारखंड के ग्राहकों की पसंद के बारे में विकास ने बताया कि यहां के लोग बांस करेला और लहसुन के अचार को बेहद पसंद करते हैं। वहीं, अगर मीठे अचार की बात की जाए, तो आम और इमली के अचार की मांग सबसे ज्यादा रहती है। वे प्रतिदिन सभी प्रकार के अचार मिलाकर 15 किलो से भी अधिक की बिक्री कर लेते हैं। इससे उन्हें रोजाना 4 से 5 हजार रुपये की कमाई हो जाती है। एक मेले में जब उनका स्टॉल करीब एक महीने तक रहता है, तो उनका कुल कारोबार डेढ़ से दो लाख रुपये तक पहुंच जाता है।

गुणवत्ता और शुद्धता का रखते हैं ख्याल

विकास कुमार ने बताया कि उनके द्वारा बेचे जाने वाले अचार की सबसे बड़ी खासियत इसके मसाले हैं। ये सभी अचार राजस्थान में ही तैयार किए जाते हैं, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाले तेल और पारंपरिक राजस्थानी मसालों का उपयोग होता है। इन अचारों को बहुत सावधानी से तैयार और संरक्षित किया जाता है, जिसके कारण ये 2 साल तक खराब नहीं होते और इनका स्वाद बना रहता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप