दीपिका पादुकोण की 8 घंटे शिफ्ट की मांग पर फिल्ममेकर इंद्रजीत लंकेश का समर्थन, कहा- कैमरा कभी झूठ नहीं बोलता मनोरंजन 2 महीने पहले 43
फिल्म इंडस्ट्री में काम के घंटों को लेकर शुरू हुई बहस में अब कन्नड़ फिल्ममेकर इंद्रजीत लंकेश भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने दीपिका पादुकोण की 8 घंटे की शिफ्ट की वकालत करते हुए इसे कलाकारों के स्वास्थ्य और प्रदर्शन के लिए जरूरी बताया है।

कामकाजी माहौल और दीपिका की मांग

फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों वर्क लाइफ बैलेंस और शूटिंग के घंटों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। अभिनेत्री दीपिका पादुकोण ने हाल ही में फिल्म सेट पर 8 घंटे की शिफ्ट की वकालत की है। उनकी इस मांग ने न केवल फिल्म निर्माण से जुड़े लोगों का ध्यान खींचा है, बल्कि कई बड़े फिल्मकारों और कलाकारों ने भी इस विषय पर अपनी राय रखना शुरू कर दिया है। इसी क्रम में कन्नड़ फिल्म उद्योग के जाने-माने निर्माता और पत्रकार इंद्रजीत लंकेश ने दीपिका पादुकोण का खुलकर समर्थन किया है। गौरतलब है कि इंद्रजीत लंकेश वही व्यक्ति हैं जिन्होंने अपनी कन्नड़ फिल्म के जरिए दीपिका पादुकोण को अभिनय की दुनिया में पेश किया था।

थकान को नहीं छिपा सकता कैमरा

इंद्रजीत लंकेश का मानना है कि अभिनय का काम किसी सामान्य कॉर्पोरेट नौकरी की तुलना में कहीं अधिक शारीरिक मेहनत वाला और चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक कलाकार को लगातार 8 घंटे या उससे अधिक समय तक कैमरे के सामने रहने के लिए मजबूर नहीं करना चाहिए। लंकेश के अनुसार, कैमरा कभी झूठ नहीं बोलता है। उन्होंने समझाया कि यदि कोई कलाकार तय सीमा से अधिक काम करता है, तो उसके चेहरे पर थकान साफ नजर आने लगती है। उन्होंने कहा, 'दर्शक पर्दे पर उसी कलाकार को देखते हैं। निर्देशक तो कैमरे के पीछे होता है, लेकिन कलाकार की थकान को पर्दे पर छिपाना नामुमकिन है।'

शूटिंग की बेहतर योजना की जरूरत

लंकेश ने सुझाव दिया कि शूटिंग के दौरान बेहतर प्लानिंग की बहुत जरूरत है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर किसी प्रमुख कलाकार के साथ 6 घंटे की शूटिंग पूरी हो जाती है, तो बाकी के 4 घंटे का समय अन्य दृश्यों को फिल्माने में इस्तेमाल किया जा सकता है। इस तरह का प्रबंधन न केवल निर्देशक के काम को जारी रखेगा, बल्कि कलाकार को भी आवश्यक आराम मिल सकेगा। उनका तर्क है कि कलाकारों को बिना ब्रेक के लंबे समय तक काम पर रखने के बजाय, उनके स्वास्थ्य और ऊर्जा के स्तर को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

कलाकार और कामकाजी मांओं का मुद्दा

दीपिका पादुकोण की इस मांग का समर्थन करते हुए इंद्रजीत लंकेश ने उन अभिनेत्रियों का विशेष रूप से उल्लेख किया जो मां बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि मां बनने के बाद अपनी पेशेवर जिम्मेदारियों और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना बहुत कठिन होता है। उनके अनुसार, बच्चे के साथ बिताया गया समय किसी भी मां के लिए अमूल्य होता है। हालांकि बच्चे की देखभाल के लिए अन्य लोग मौजूद हो सकते हैं, लेकिन एक मां का स्नेह और उपस्थिति कोई दूसरा नहीं ले सकता। इसलिए, यदि कोई अभिनेत्री मां है, तो उसके लिए तय कामकाजी घंटे और भी अधिक मायने रखते हैं।

प्रदर्शन पर काम के घंटों का असर

इंद्रजीत लंकेश का यह भी कहना है कि जब कलाकार थकान की स्थिति में काम करते हैं, तो बाद में उन्हीं से सवाल किए जाते हैं कि वे स्क्रीन पर थके हुए क्यों लग रहे हैं या उनकी उम्र अधिक क्यों दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि कलाकारों के प्रदर्शन पर इसका सीधा असर पड़ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान्य कार्यालयों में कर्मचारी चाय और कॉफी के अंतराल के साथ काम करते हैं, लेकिन फिल्म सेट पर ऐसा नहीं होता। उनके अनुसार, कलाकारों के लिए 6 से 7 घंटे की शिफ्ट सबसे आदर्श होनी चाहिए, ताकि वे अपनी सर्वश्रेष्ठ परफॉर्मेंस दे सकें और साथ ही अपनी निजी जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभा सकें।

फिल्म जगत में बदलाव की उम्मीद

दीपिका पादुकोण द्वारा उठाई गई यह आवाज अब पूरे फिल्म उद्योग में चर्चा का विषय बन चुकी है। इंद्रजीत लंकेश ने दीपिका की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने यह कदम उठाकर सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि हर महिला और हर कलाकार के हक में आवाज बुलंद की है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि फिल्म जगत अब इस दिशा में गंभीरता से विचार करेगा। तय काम के घंटे न केवल कलाकारों की मानसिक और शारीरिक सेहत में सुधार लाएंगे, बल्कि यह उनके काम की गुणवत्ता को भी पहले से बेहतर बनाने में मदद करेंगे। इस बहस ने एक ऐसी नींव रख दी है जहाँ कलाकार अपने अधिकारों और सम्मानजनक काम के वातावरण के लिए मुखर हो रहे हैं।

आन्या कपूर पाबना के मनोरंजन रिपोर्टर हैं, जो बॉलीवुड, ओटीटी और टेलीविजन की खबरें कवर करते हैं। फिल्मों, वेब सीरीज, सेलिब्रिटी और बॉक्स ऑफिस पर उनकी पैनी नजर रहती है। वे मनोरंजन जगत की हलचल को रोचक अंदाज में दर्शकों तक लाते हैं।

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