बोकारो के दीपक प्रसाद ने रचा इतिहास, रेलवे की नौकरी के साथ चौथे प्रयास में बने एसडीएम झारखंड 2 महीने पहले 86
बोकारो के दीपक प्रसाद ने बीपीएससी की 70वीं परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। रेलवे में सीनियर सेक्शन इंजीनियर के तौर पर कार्यरत दीपक ने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से एसडीएम पद तक का सफर तय किया।

सफलता की नई इबारत

बोकारो जिले के दुदींबाग बाजार के निवासी और किराना दुकान चलाने वाले वीरेंद्र प्रसाद के बेटे दीपक प्रसाद ने बीपीएससी की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता का परचम लहराया है। दीपक ने इस प्रतिष्ठित परीक्षा में 138वीं रैंक हासिल कर एसडीएम यानी अनुमंडल पदाधिकारी के पद के लिए अपनी जगह पक्की की है। दीपक की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने इसे नौकरी के साथ तैयारी करते हुए अपने चौथे प्रयास में हासिल किया है। वर्तमान में दीपक पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में भारतीय रेलवे में सीनियर सेक्शन इंजीनियर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

शिक्षा और करियर का सफर

दीपक की शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई बोकारो इस्पात विद्यालय, सेक्टर-1सी से पूरी की। इसके बाद उन्होंने बोकारो इस्पात सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सेक्टर-2सी से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने मध्य प्रदेश का रुख किया और वर्ष 2017 में सागर कॉलेज, भोपाल से बीटेक की डिग्री प्राप्त की। बीटेक के दौरान ही उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की दुनिया में कदम रख दिया था। एमटेक की पढ़ाई के दौरान ही उनका चयन भारतीय रेलवे में जूनियर इंजीनियर के पद पर हो गया था, जहां से उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की।

दीपक का सफलता मंत्र

अपनी इस लंबी यात्रा के बारे में बात करते हुए दीपक ने बताया कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी का सबसे पहला और अनिवार्य चरण पाठ्यक्रम यानी सिलेबस को गहराई से समझना होता है। उनका मानना है कि एक बार लक्ष्य तय हो जाने के बाद उस पर पूरी ईमानदारी और मेहनत से डटे रहना चाहिए। उन्होंने उन युवाओं को संदेश दिया जो असफलताओं से घबरा जाते हैं कि एक या दो बार असफलता मिलने पर कभी भी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। यदि आपकी मेहनत और लगन सच्ची है, तो सफलता मिलना निश्चित है। दीपक ने अपनी इस उपलब्धि का बड़ा श्रेय अपने मेंटर और खड़गपुर में कार्यरत कार्य प्रबंधक सिद्धांत वर्मा को दिया है, जिनके मार्गदर्शन ने उन्हें विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने की ऊर्जा दी। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सफलता में अपने माता-पिता और पत्नी मुक्ता कुमारी के सहयोग को भी अमूल्य बताया।

परिवार का दशकों पुराना संघर्ष

दीपक की कामयाबी के पीछे उनके परिवार का कई दशकों का कठिन संघर्ष छिपा है। दीपक के दादा भगवान लाल साह और पिता वीरेंद्र प्रसाद मूल रूप से बिहार के सिवान जिले के बैदापुर बिशनपुर गांव के रहने वाले थे। बेहतर जीवन और आजीविका की तलाश में वीरेंद्र प्रसाद वर्ष 1981 में बोकारो आए थे। यहां उन्होंने दुदींबाग बाजार में एक छोटी सी किराना दुकान खोलकर अपने परिवार का भरण-पोषण किया। संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने अपने तीनों बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज उनके तीनों बच्चे अपने-अपने क्षेत्र में सफल हैं। दीपक की बड़ी बहन ने बीजीएच से नर्सिंग की पढ़ाई पूरी की और वे वर्तमान में जमशेदपुर के टीएमसी में कार्यरत हैं। वहीं, उनके छोटे भाई आशुतोष प्रसाद सीआईएसएफ में अपनी सेवाएं देकर देश की रक्षा कर रहे हैं। इस प्रकार, तीनों बच्चों ने अपने माता-पिता के वर्षों के संघर्ष को सार्थक सिद्ध किया है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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