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एक घंटा पहले
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विचारों
प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र भाषा पर नाराजगी
नीट पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई टिप्पणियां चर्चा का विषय बनी हुई हैं। संसद के मॉनसून सत्र के दौरान भी यह मुद्दा गूंजा। भारतीय जनता पार्टी की सांसद कंगना रनौत ने पीएम मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल लोगों के आचरण पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि यह किस तरह के छात्र हैं जो इस तरह की अश्लील भाषा का प्रयोग कर रहे हैं।
कंगना रनौत का तीखा प्रहार
इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कंगना रनौत ने कहा कि 75 साल के प्रधानमंत्री को निशाना बनाना और उनकी दिवंगत मां के बारे में भद्दी गालियां देना पूरी तरह से अस्वीकार्य है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं भी छात्र आंदोलनों में भाग लिया है, लेकिन प्रदर्शन का यह तरीका बिल्कुल गलत है। कंगना ने सवाल किया कि क्या ये वास्तव में छात्र हैं। उन्होंने आगे कहा कि अगर भविष्य में इन लोगों को सुप्रीम कोर्ट के वकीलों या कानूनी सलाह की आवश्यकता पड़ी, तो क्या इनके माता-पिता इसका आर्थिक बोझ उठा पाएंगे। कंगना के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के पास खुद इस तरह के खर्च उठाने के साधन नहीं हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे खुद 16 साल की उम्र से अपना करियर बनाने में जुट गई थीं और कभी अपने अभिभावकों पर बोझ नहीं बनीं। एक समाज के रूप में ऐसी भाषा को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
पीएम मोदी की प्रतिबद्धता और सरकारी कदम
केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में पेपर लीक के खिलाफ पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026 पेश किए जाने पर भी कंगना रनौत ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने देश और नागरिकों के हित में छोटे से लेकर बड़े हर मुद्दे को हल करने का जो संकल्प लिया है, वह दुनिया के लिए एक उदाहरण है। सरकार ने परीक्षा प्रणाली को भ्रष्टाचार से मुक्त करने के उद्देश्य से एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। कंगना ने कहा कि यह संशोधन विधेयक प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को स्पष्ट करता है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि यूपीए सरकार के समय शिक्षा बजट बहुत कम था और आज विपक्ष की आलोचना केवल उनकी हताशा को प्रदर्शित करती है।
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