सरकारी नौकरियों में मेरिट व्यवस्था पर भड़के भाजपा विधायक दादा गौतम, मनोहर लाल खट्टर की नीति को बताया सबसे बड़ी गलती हरियाणा एक घंटा पहले 5
जींद के सफीदों से भाजपा विधायक रामकुमार गौतम ने पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की मेरिट-आधारित नौकरी नीति पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सरकार विरोधी लहर से बचने के लिए तुरंत कदम उठाने की चेतावनी दी है।

हरियाणा में मेरिट-आधारित भर्ती नीति पर अपनी ही सरकार के विधायक ने उठाए गंभीर सवाल

हरियाणा की राजनीति में सरकारी भर्तियों को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। जींद जिले की सफीदों विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के विधायक रामकुमार गौतम उर्फ दादा गौतम ने अपनी ही पार्टी की पिछली सरकार के फैसलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के शासनकाल में लागू की गई मेरिट के आधार पर नौकरी देने की नीति को उनकी सबसे बड़ी गलती करार दिया है। विधायक के इस बयान के बाद राज्य में राजनीतिक बयानबाजी तेज होने के आसार नजर आ रहे हैं।

"सरकार बनाने वालों के बच्चे बेरोजगार रहेंगे तो क्या करेगी मेरिट?"

सफीदों से भाजपा विधायक दादा गौतम ने बेरोजगारी और नौकरियों के चयन पैमाने पर बोलते हुए कहा कि सिर्फ मेरिट को आधार बनाना सही नहीं है। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि जिस जनता और कार्यकर्ताओं के दम पर सरकार बनती है, यदि उन्हीं के बच्चे बेरोजगार रह जाएं तो ऐसी मेरिट का क्या फायदा? उन्होंने कहा कि मेरिट की होड़ में पीछे छूट जाने वाले कई युवाओं की उम्र निकल चुकी है। वे सरकारी नौकरी पाने की तय आयु सीमा से बाहर (ओवरएज) हो चुके हैं और अब उनके पास रोजगार का कोई जरिया नहीं बचा है।

ड्राइवर के परिवार की परेशानी और युवाओं की शादी का मुद्दा उठाया

अपनी बात को मजबूती से रखने के लिए विधायक दादा गौतम ने अपने ही ड्राइवर के परिवार का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि उनके ड्राइवर के चार भाई हैं और मेरिट व्यवस्था के कारण चारों ही ओवरएज हो गए, जिससे किसी को भी नौकरी नहीं मिल सकी। युवाओं की सामाजिक स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि रोजगार न मिलने के कारण नौजवानों के विवाह और गृहस्थ जीवन में भारी परेशानियां आ रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे हालात में कई युवा शादी-ब्याह से वंचित रह जाएंगे और कुंवारे ही रह जाएंगे।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को एंटी-इनकंबेंसी पर किया आगाह

विधायक दादा गौतम ने शासन व्यवस्था पर अपनी बात रखते हुए कहा कि हर राजा का यह मुख्य धर्म होता है कि वह अपनी प्रजा में सभी को उनका अधिकार प्रदान करे। मेरिट की परिभाषा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार को भी चेताया। उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि अगर समय रहते ओवरएज हो चुके और परेशान युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं निकाला गया, तो राज्य में एंटी-इनकंबेंसी (सरकार विरोधी लहर) से निपटना बेहद कठिन हो जाएगा।

पारदर्शिता और युवाओं की समस्याओं के बीच छिड़ी नई बहस

एक तरफ जहां राज्य सरकार नौकरियों में पारदर्शिता और मेरिट को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि मानती आई है, वहीं दूसरी तरफ ओवरएज हो रहे अभ्यर्थियों और बढ़ती बेरोजगारी को लेकर दादा गौतम का यह बयान सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है। अब देखना यह होगा कि भाजपा संगठन और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी अपने ही विधायक के इन तीखे बयानों पर क्या रुख अपनाते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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