क्या डूरंड लाइन पर होने वाला है बड़ा युद्ध? तालिबान की स्पेशल फोर्सेज ने पाकिस्तान को दी सीधी चुनौती विश्व एक घंटा पहले 6
पाकिस्तान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने अपनी स्पेशल डिफेंसिव फोर्सेज का आक्रामक वीडियो जारी कर बड़ी चेतावनी दी है। सीमा पर लगातार झड़पों और टीटीपी के मुद्दे ने दोनों देशों के व्यापार को 95 फीसदी तक गिरा दिया है।

डूरंड लाइन पर बढ़ता सैन्य तनाव

डूरंड लाइन के आसपास पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव इस वक्त बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। दोनों देशों के बीच लगातार खूनी झड़पें और सैन्य टकराव की खबरें सामने आ रही हैं। इस माहौल के बीच अफगानिस्तान में सत्ता संभाल रही तालिबान सरकार ने अपनी स्पेशल डिफेंसिव फोर्सेज की आक्रामक तैयारियों का एक वीडियो सार्वजनिक किया है। पाकिस्तान पर आरोप है कि वह टीटीपी को संरक्षण दे रहा है, जिसके जवाब में सीमा पर चल रहे हमलों ने दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया है। आंकड़ों के अनुसार, इन बॉर्डर विवादों के कारण द्विपक्षीय व्यापार में 95% की भारी गिरावट देखी गई है। वहीं, पाकिस्तान द्वारा तालिबान विरोधी गुटों के साथ गुप्त संपर्क साधने की खबरों ने स्थिति को और भी अधिक विस्फोटक बना दिया है, जिससे भविष्य में बड़े युद्ध की आशंका बढ़ गई है।

तालिबान का स्पेशल फोर्स वीडियो और इस्लामाबाद को संदेश

डूरंड लाइन पर पाकिस्तान के साथ जारी भीषण संघर्ष के बीच तालिबान ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया है। अफगानिस्तान ने अपनी स्पेशल डिफेंसिव फोर्सेज की मारक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए एक वीडियो जारी किया है। इस वीडियो के माध्यम से तालिबान ने इस्लामाबाद को एक स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि पाकिस्तान ने सीमा का उल्लंघन किया या किसी प्रकार का हमला करने का दुस्साहस किया, तो उनकी स्पेशल फोर्स उसे करारा जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

वीडियो के तीन बड़े निहितार्थ

  • पूर्वी सीमा का रक्षक: तालिबान ने इन विशेष दस्तों को अपनी इस्लामिक व्यवस्था और देश के पूर्वी हिस्से यानी पाकिस्तान की सीमा का मुख्य रक्षक घोषित किया है।
  • साइकोलॉजिकल वॉर: डूरंड लाइन पर पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी और ड्रोन हमलों के बीच यह वीडियो पाकिस्तान की सेना और वहां की जनता पर मानसिक दबाव बनाने की एक रणनीति है।
  • सैन्य मुस्तैदी का सबूत: हालांकि यह वीडियो किसी तात्कालिक नए युद्ध की घोषणा नहीं है, लेकिन यह स्पष्ट करता है कि तालिबान किसी भी बड़े हमले का सामना करने के लिए हर समय सतर्क है।

तालिबान के रक्षा मंत्रालय का दावा है कि उनके इन विशेष बलों को आधुनिक हथियारों और हाई-टेक सैन्य रणनीतियों में निपुण बनाया गया है, जो किसी भी आपात स्थिति में सटीक निशाना साधने में सक्षम हैं।

19 अक्टूबर से डूरंड लाइन पर दहक रही है आग

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि 19 अक्टूबर के बाद से दोनों देशों के बीच कम से कम तीन बड़ी और हिंसक सैन्य झड़पें हो चुकी हैं। 27 और 28 अक्टूबर की हिंसा ने सीमा पर रहने वाले लोगों के बीच भारी दहशत पैदा कर दी है।

अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत और पाकिस्तान के निचले दक्षिण वजीरिस्तान की सीमा पर भारी हथियारों से गोलाबारी की गई। स्थानीय निवासियों का कहना है कि तालिबानी लड़ाके उन पुरानी चौकियों को फिर से हासिल करना चाहते हैं जिन्हें वे पूर्व के हमलों के दौरान खाली करने के लिए मजबूर हुए थे। तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी ड्रोन्स ने पक्तिका में उनके सुरक्षा ठिकानों पर हमला किया है। जवाब में तालिबान ने भी पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाया और सैनिकों के हताहत होने का दावा किया है।

तोरखम बॉर्डर पर भी 28 अक्टूबर को भारी गोलीबारी हुई। इस हिंसा की चपेट में आकर एक मासूम बच्चा और एक राहत संस्था का कर्मचारी घायल हो गया। खैबर पख्तूनख्वा के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि अफगान तालिबान किसी गलतफहमी में न रहे, क्योंकि पाकिस्तान अपनी संप्रभुता के किसी भी उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं करेगा।

टीटीपी का संकट और ओपन वॉर की घोषणा

इस दुश्मनी की जड़ में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का मुद्दा है। पाकिस्तान का आरोप है कि काबुल पर कब्जा करने के बाद से अफगान तालिबान टीटीपी के आतंकियों को सुरक्षित पनाहगाह दे रहा है। पाकिस्तान का यह दावा है कि ये आतंकी अफगान धरती का उपयोग करके पाकिस्तान के भीतर आत्मघाती हमले करवा रहे हैं। 18 सितंबर को उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान में हुए एक भीषण आत्मघाती हमले में 31 लोग मारे गए थे, जिसकी जिम्मेदारी टीटीपी से जुड़े गुट ने ली थी। इसके बाद से पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ पहले ही तालिबान के खिलाफ ओपन वॉर यानी खुली जंग की घोषणा कर चुके हैं।

क्या पाकिस्तान तालिबान विरोधियों से मिला रहा हाथ?

द न्यू यॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तानी सैन्य और खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के शीर्ष अधिकारी गुप्त रूप से तालिबान विरोधी अफगान गुटों से मुलाकातें कर रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान को कमजोर करने के लिए पाकिस्तान अफगानिस्तान के भीतर ही गृहयुद्ध जैसी स्थिति पैदा करने की खतरनाक खेल खेल रहा है। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि यह दांव पाकिस्तान पर उल्टा भी पड़ सकता है और पूरे क्षेत्र की शांति को खतरे में डाल सकता है।

व्यापार में 95% की भारी गिरावट

सीमा बंद होने और तनाव के कारण आम जनता और व्यापारियों की आर्थिक स्थिति बदतर हो गई है। ट्रेड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ पाकिस्तान (TDAP) के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 में दोनों देशों के बीच व्यापार में 95 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। पाकिस्तान-अफगानिस्तान जॉइंट चैंबर ऑफ कॉमर्स के उपाध्यक्ष मोहम्मद यूनुस मोहम्मद ने बताया कि पाकिस्तान के साथ उनका व्यापार लगभग पूरी तरह से ठप हो चुका है। इससे न केवल दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार प्रभावित हुआ है, बल्कि मध्य एशिया से जुड़ने वाला ट्रांजिट ट्रेड भी बुरी तरह बाधित हुआ है।

भविष्य का संकट: क्या डूरंड लाइन पर छिड़ेगी महाजंग?

तालिबान द्वारा अपनी स्पेशल फोर्सेज का प्रदर्शन केवल एक दिखावा नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान को यह स्पष्ट संदेश है कि वे अब दबाव में झुकने वाले नहीं हैं। डूरंड लाइन को तालिबान कभी आधिकारिक सीमा नहीं मानता और पाकिस्तान के सैन्य अभियानों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यदि टीटीपी का मुद्दा इसी तरह बना रहा और दोनों तरफ से गोलाबारी जारी रही, तो डूरंड लाइन पर शांति की संभावना क्षीण हो जाएगी। स्पेशल फोर्सेज की तैनाती और निरंतर हो रहे संघर्ष इस बात का संकेत दे रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह तनाव एक विनाशकारी युद्ध का रूप ले सकता है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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