घर से शुरू किया छोटा काम, अपनी कमाई से खरीद ली ईको गाड़ी; हेमलता साहू बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल छत्तीसगढ़ 4 दिन पहले 6
बिलासपुर के सुलौनी गांव की हेमलता साहू ने स्व-सहायता समूह की मदद से घर से छत्तीसगढ़ी उत्पाद बनाकर हर महीने 30 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की और अपनी कमाई से ईको गाड़ी खरीदी। उनकी कहानी स्वरोजगार का सपना देखने वाली ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले की ग्राम पंचायत सुलौनी में रहने वाली हेमलता साहू ने अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और स्व-सहायता समूह के सहयोग से अपने जीवन की दिशा ही बदल डाली। कभी आर्थिक तंगी का सामना करने वाली हेमलता आज अपने घर से ही देसी हल्दी पाउडर, मिर्च पाउडर, जिमी कांदा बड़ी, रखिया बड़ी और ठेठरी, खुरमी व गुजिया जैसे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन तैयार कर बाजार में बेच रही हैं। उनके बनाए उत्पादों की मांग अब गांव-गांव तक फैल चुकी है।

साप्ताहिक बाजारों में नियमित बिक्री और ग्राहकों के ऑर्डर के बल पर वह हर महीने 30 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रही हैं। उनकी इस कामयाबी ने इलाके की दूसरी महिलाओं के सामने भी आत्मनिर्भर बनने का नया रास्ता खोल दिया है।

स्व-सहायता समूह से मिली नई शुरुआत

हेमलता बताती हैं कि करीब चार साल पहले उनके परिवार की आर्थिक हालत बेहद कमजोर थी और घर की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी कठिन हो रहा था। ऐसे कठिन दौर में उन्होंने गांव की ज्योति स्व-सहायता समूह से जुड़ने का फैसला लिया। समूह के जरिए उन्हें लोन की सुविधा मिली, जिससे उन्होंने अपना छोटा स्वरोजगार आरंभ किया। धीरे-धीरे उनका कारोबार बढ़ता गया और आज यही उनके परिवार की आमदनी का मुख्य जरिया बन चुका है।

घर पर ही तैयार होते हैं छत्तीसगढ़ी उत्पाद

हेमलता अपने घर पर ही देसी हल्दी पाउडर, मिर्च पाउडर, जिमी कांदा बड़ी, रखिया बड़ी, ठेठरी, खुरमी और गुजिया जैसे पारंपरिक उत्पाद बनाती हैं। इन्हें वह अपनी समिति के नाम लिखे डिब्बों में पैक कर बाजार तक पहुंचाती हैं। गुणवत्ता और बेहतरीन स्वाद के कारण उनके उत्पादों को अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।

साप्ताहिक बाजारों में अच्छी बिक्री

जहां-जहां साप्ताहिक बाजार लगते हैं, हेमलता वहां अपनी दुकान सजाकर उत्पाद बेचती हैं। उनके मुताबिक एक बाजार में वह लगभग 4000 से 5000 रुपये तक की बिक्री कर लेती हैं और सारे खर्च निकालने के बाद करीब एक हजार रुपये तक की बचत हो जाती है। इसी नियमित आमदनी के चलते वह हर महीने 30 हजार रुपये से अधिक की कमाई कर पा रही हैं।

अपनी कमाई से खरीदी ईको गाड़ी

स्वरोजगार से मिली सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि हेमलता ने अपनी कमाई से ईको वाहन भी खरीद लिया है। फिलहाल वह अपने परिवार का पूरा खर्च खुद उठा रही हैं और पूरी तरह आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।

गांव-गांव तक पहुंची मांग

हेमलता के उत्पाद अब सिर्फ स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रह गए हैं। आसपास के कई गांवों से लोग उनके उत्पाद खरीदने पहुंचते हैं और कई ग्राहक पहले से ऑर्डर देकर सामान तैयार रखवाते हैं। लगातार बढ़ती यह मांग उनके कारोबार को नई पहचान दिला रही है।

अकेले संभालती हैं पूरा कारोबार

हेमलता आगे बताती हैं कि उत्पाद बनाने का पूरा काम वह स्वयं करती हैं। निर्माण, पैकिंग और गुणवत्ता की जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर है, जबकि उनके पति केवल बाजार में सामान बेचने में मदद करते हैं। इस तरह यह पूरा व्यवसाय परिवार के दम पर ही चल रहा है।

महिलाओं को आत्मनिर्भरता का संदेश

हेमलता साहू का कहना है कि जो महिलाएं घर में रहकर कुछ नया करने की सोच रही हैं, उन्हें हिचक छोड़कर आगे बढ़ना चाहिए। स्व-सहायता समूहों से जुड़ने पर आसानी से लोन मिल जाता है, जिससे छोटा कारोबार शुरू किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि शुरुआत में थोड़ी झिझक जरूर होती है, लेकिन मेहनत और लगन से सफलता निश्चित रूप से मिलती है। आज उनकी यह कामयाबी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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