बिलासपुर की गंगा साहू ने ई-रिक्शा के जरिए बदली अपनी दुनिया, अब खुद कमाकर परिवार को दे रहीं सहारा छत्तीसगढ़ 6 घंटे पहले 4
छत्तीसगढ़ सरकार की दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना ने बिलासपुर की एक साधारण गृहिणी गंगा साहू को न केवल रोजगार दिया, बल्कि उनके आत्मविश्वास को नई उड़ान दी है। अब वे ई-रिक्शा चलाकर न केवल अपनी आमदनी का जरिया बना चुकी हैं, बल्कि घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

बदलाव की एक नई कहानी

कभी घर की चारदीवारी और चूल्हा-चौका तक ही सीमित रहने वाली गंगा साहू की दुनिया अब पूरी तरह बदल चुकी है। बिलासपुर की रहने वाली गंगा साहू ने साबित कर दिया है कि अगर सही समय पर सरकारी योजनाओं का साथ मिले, तो महिलाएं किसी भी क्षेत्र में अपनी पहचान बना सकती हैं। आज वे एक आत्मनिर्भर महिला के रूप में पहचानी जा रही हैं और ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का गौरव बढ़ा रही हैं। यह बदलाव छत्तीसगढ़ शासन के श्रम विभाग द्वारा चलाई जा रही दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के माध्यम से संभव हो पाया है।

गृहिणी से बनीं आत्मनिर्भर

गंगा साहू के लिए यह दौर किसी बड़े परिवर्तन से कम नहीं है। योजना का लाभ लेने से पहले, उनका अधिकांश समय घर के कामों और बच्चों की देखभाल में व्यतीत होता था। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उनके पास आय का कोई स्वतंत्र साधन उपलब्ध नहीं था। लेकिन, जब उन्होंने सरकारी योजना के बारे में जाना और आवेदन किया, तो उनके जीवन का एक नया अध्याय शुरू हुआ। उन्हें श्रम विभाग की ओर से ई-रिक्शा प्रदान किया गया, जिसने उन्हें एक गृहिणी से बदलकर एक स्वावलंबी उद्यमी बना दिया है।

नियमित आय और जिम्मेदारी

ई-रिक्शा मिलने के बाद गंगा साहू ने इसे पूरी लगन और मेहनत के साथ चलाना शुरू किया। आज वे नियमित रूप से रिक्शा चलाकर अपनी आमदनी अर्जित कर रही हैं। यह कमाई उनके निजी खर्चों को पूरा करने के साथ-साथ परिवार के आर्थिक बोझ को कम करने में भी बहुत मददगार साबित हो रही है। अब वे अपनी मेहनत के दम पर पति और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर घर चलाने की जिम्मेदारी उठा रही हैं। गंगा बताती हैं कि इस योजना ने उन्हें केवल आर्थिक संबल ही नहीं दिया, बल्कि समाज में सम्मान के साथ जीने का एक नया नजरिया भी प्रदान किया है।

आत्मविश्वास की नई उड़ान

गंगा साहू का अनुभव दर्शाता है कि रोजगार केवल पैसे कमाने का साधन नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति के भीतर छिपे आत्मविश्वास को जगाने का माध्यम भी है। पहले जो महिला केवल घरेलू जिम्मेदारियों के इर्द-गिर्द सिमटी हुई थी, आज वह सड़क पर अपने ई-रिक्शा के साथ आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है। उनका कहना है कि योजना ने उन्हें न केवल एक सवारी साधन दिया, बल्कि अपने दम पर खुद का वजूद बनाने का अवसर भी दिया है। उनकी यह कहानी अब अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है, जो अपनी आर्थिक आजादी की तलाश में हैं।

महिलाओं के लिए सरकारी पहल

दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना है ताकि वे आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। गंगा साहू की सफलता इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि यदि सरकार की योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचे, तो परिवार की आर्थिक दशा और दिशा दोनों में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। यह योजना साबित करती है कि रोजगार के उचित अवसर मिलने पर महिलाएं घर की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे सकती हैं और अपनी आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती हैं। बिलासपुर जैसे शहरों में इस तरह की पहल से महिलाओं के स्वावलंबन को काफी बल मिल रहा है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप