राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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विचारों
युवाओं के लिए प्रेरणा बने प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में वडनगर से वाराणसी तक निकाली गई सेवा संकल्प यात्रा में शामिल हुए उत्साही युवाओं के साथ संवाद किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बातचीत में प्रधानमंत्री ने युवाओं का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें राष्ट्र निर्माण का सारथी बताया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया कि वडनगर और वाराणसी दोनों ही शहर हजारों साल पुरानी ऐतिहासिक विरासत को संजोए हुए हैं और आज भी उतने ही जीवंत हैं।
वडनगर और काशी का आत्मीय संबंध
प्रधानमंत्री ने इन दोनों शहरों के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव को साझा करते हुए कहा कि उनके लिए वडनगर उनकी जन्मभूमि है, जबकि वाराणसी उनकी कर्मभूमि है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि दोनों ही शहरों पर साक्षात महादेव का आशीर्वाद बना हुआ है। काशी में जहाँ बाबा विश्वनाथ का सानिध्य है, वहीं वडनगर हाटकेश्वर महादेव की पावन भूमि है। प्रधानमंत्री ने यात्रा में शामिल साथियों के अनुभवों को सुनकर कहा कि उन्हें ऐसा महसूस हुआ जैसे वह खुद भी उनके साथ इस यात्रा का हिस्सा बन गए हों।
यात्रा की चुनौतियों और युवाओं का समर्पण
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जब वह संगठन के स्तर पर काम करते थे, तब उन्हें भी यात्राओं पर जाने का अवसर मिलता था। उस अनुभव से उन्हें यह भलीभांति पता है कि पदयात्रा या ऐसी यात्राओं में कितनी कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इन तमाम मुश्किलों के बावजूद युवाओं ने जिस दृढ़ संकल्प और लगन के साथ इस सेवा अभियान को आगे बढ़ाया है, वह वास्तव में सराहनीय है।
सेवा भाव से ही संभव है जनकल्याण
प्रधानमंत्री के अनुसार, सेवा की भावना ही विकास कार्यों की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति होती है। जब कोई काम पूरी निष्ठा और सेवा भाव के साथ किया जाता है, तभी उसका सही लाभ आम जनता तक पहुँचता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि आज करोड़ों जरूरतमंदों को जो मुफ्त अनाज मिल पा रहा है या आयुष्मान योजना जैसी स्वास्थ्य पहल जो धरातल पर दिख रही हैं, वे सभी सेवा भाव का ही परिणाम हैं। उन्होंने पीएम-किसान और पीएम सूर्य घर योजना का जिक्र करते हुए कहा कि सरकारी योजनाओं की सफलता का सबसे बड़ा पैमाना उनकी Last-Mile Delivery यानी अंतिम व्यक्ति तक पहुँच है।
2047 तक विकसित भारत का संकल्प
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि राजनीति, चुनाव और शासन व्यवस्था अपनी जगह पर हैं, लेकिन राष्ट्र निर्माण और 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य सबसे ऊपर है। उन्होंने युवाओं से कहा कि आज की युवा पीढ़ी न केवल विकसित भारत की निर्माता है, बल्कि यही वह पीढ़ी है जिसे इसके दूरगामी परिणामों और प्रगति का सबसे अधिक लाभ मिलेगा। इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए भारत को जमीनी स्तर पर समझना और अनुभव करना आवश्यक है।
अनुभव और आकांक्षाओं का महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने युवाओं को सलाह दी कि देश की बारीकियों को समझने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों, भौगोलिक परिस्थितियों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के लोगों से मिलना बहुत जरूरी है। जब युवा उनके सपनों और आकांक्षाओं को करीब से जानेंगे, तभी वे राष्ट्र की वास्तविक सेवा कर पाएंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि यह 'सेवा संकल्प यात्रा' इन युवाओं के जीवन में एक अहम पड़ाव साबित होगी और उन्हें देश की सेवा के लिए एक नया दृष्टिकोण प्रदान करेगी।
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