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2 घंटे पहले
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विचारों
पुराने दौर की यादें
एक ऐसा दौर था जब बजाज चेतक, प्रिया और एलएमएल वेस्पा जैसे स्कूटर सड़कों की शान हुआ करते थे। उन दिनों स्कूटर चलाना किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि बाइक की तरह ही इसमें बार-बार क्लच दबाना और गियर बदलना पड़ता था। हालांकि, समय के साथ चीजें बदलीं और अब बाजार में एक्टिवा और जुपिटर जैसे गियरलेस स्कूटरों का राज है।
क्यों जरूरी थे पहले गियर?
पुराने स्कूटरों में गियर होने के पीछे ठोस तकनीकी कारण थे। उस समय के इंजन कम पावरफुल हुआ करते थे, इसलिए बेहतर माइलेज और भारी वजन ढोने के लिए अलग-अलग गियर रेशियो की जरूरत पड़ती थी। हैंडल के बाईं ओर क्लच और गियर बदलने का सिस्टम होता था, जो घने ट्रैफिक में राइडर के लिए काफी थकाऊ साबित होता था।
CVT तकनीक का कमाल
आज के आधुनिक स्कूटरों में गियर न होने का सबसे मुख्य कारण CVT यानी 'कॉन्टिनुअस वेरिएबल ट्रांसमिशन' तकनीक है। यह तकनीक कैसे काम करती है, इसे इन बिंदुओं से समझें:
- इसमें गियरबॉक्स के बजाय दो पुली और एक रबर बेल्ट का इस्तेमाल किया जाता है।
- जैसे ही चालक एक्सीलेटर घुमाता है, पुली का आकार खुद ब खुद बदल जाता है।
- यह सिस्टम गाड़ी की गति के अनुसार सही गियर रेशियो खुद चुन लेता है, जिससे राइडर को कोई मैनुअल मेहनत नहीं करनी पड़ती।
क्यों गियरलेस स्कूटर हैं लोगों की पहली पसंद?
गियरलेस स्कूटरों की लोकप्रियता के पीछे कई बड़े कारण हैं:
- आसान ड्राइविंग: इसमें क्लच का झंझट खत्म होने से महिलाएं, बुजुर्ग और युवा हर कोई इसे बेहद आसानी से चला सकता है।
- ट्रैफिक में सहूलियत: शहरों के भारी ट्रैफिक में बार-बार गियर बदलने की टेंशन खत्म होने से ड्राइविंग तनाव काफी कम हो गया है।
- बेहतर स्टोरेज और डिजाइन: गियरबॉक्स हटने के कारण इंजन कॉम्पैक्ट हो गया है, जिससे सीट के नीचे सामान रखने की ज्यादा जगह (अंडर-सीट स्टोरेज) मिलती है और स्कूटर में फ्लैट फ्लोरबोर्ड देना आसान हो गया है।
आज के दौर में लोग ड्राइविंग में आराम और सहूलियत को ज्यादा अहमियत देते हैं, यही वजह है कि कंपनियों ने मैनुअल गियर वाले स्कूटरों का निर्माण पूरी तरह बंद कर दिया है।
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