मध्य प्रदेश
एक दिन पहले
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विचारों
भोपाल की सड़कों पर अजीब स्थिति
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इन दिनों विरोध प्रदर्शन का एक ऐसा तरीका चर्चा का विषय बना हुआ है जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कटारा हिल्स क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली स्वर्ण कुंज कॉलोनी के निवासी लंबे समय से जर्जर सड़क और जल निकासी की समस्या से जूझ रहे थे। जब अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा बार-बार गुहार लगाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो लोगों ने सड़क के कीचड़ में ही धान की रोपाई कर अपना विरोध दर्ज कराया। यह प्रदर्शन न केवल प्रशासन की उदासीनता को उजागर करता है, बल्कि निवासियों की लाचारी को भी बयां करता है।
सड़क या खेत: निवासियों का दर्द
कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि सड़क की हालत इतनी बदतर हो चुकी है कि वहां आवाजाही लगभग असंभव है। स्थानीय निवासी मीना मिश्रा ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि जब सड़क पर धान उगाने के अलावा कोई और काम मुमकिन नहीं है, तो उन्होंने यही करना उचित समझा। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि कॉलोनी में इतने महंगे मकान खरीदने के बाद वे नगर निगम को नियमित रूप से टैक्स का भुगतान करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें मूलभूत सुविधाएं तक नसीब नहीं हो रही हैं। कॉलोनी के हालात अब ऐसे हो गए हैं कि पूरी सड़क किसी खेत जैसी प्रतीत होती है।
सीवेज और पेयजल का संकट
समस्या केवल सड़क टूटी होने तक ही सीमित नहीं है। निवासी शिवपाल सिंह ने बताया कि खराब सड़क के कारण स्थिति यह है कि उन्हें अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए गोद में उठाकर ले जाना पड़ता है। उन्होंने आगे कहा कि अगर बारिश का दौर और तेज हुआ, तो पानी का स्तर ऊपर तक बढ़ जाएगा, क्योंकि जल निकासी का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। इसके अलावा, क्षेत्र में सीवेज की गंभीर समस्या है। दूषित पानी जलभराव के कारण ट्यूबवेल तक पहुंच रहा है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी बढ़ गए हैं। लोग मजबूरन उसी दूषित पानी को पीने को विवश हैं जो सड़क पर जमा रहता है।
प्रशासन के दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं लोग
विरोध प्रदर्शन में शामिल महेश वशिष्ठ ने बताया कि उन्होंने समाधान के लिए हर संभव दरवाजा खटखटाया है। मेयर से लेकर नगर निगम कमिश्नर, स्थानीय विधायक, पार्षद और सहकारिता विभाग तक, निवासियों ने अनगिनत बार लिखित शिकायतें और आवेदन दिए हैं। इसके बावजूद, अब तक केवल आश्वासन ही मिले हैं। हैरानी की बात यह है कि विधायक की ओर से सड़क निर्माण के लिए दो बार भूमि पूजन भी किया जा चुका है, फिर भी धरातल पर निर्माण कार्य का कहीं कोई नामो निशान नहीं है।
भविष्य में आंदोलन तेज करने की चेतावनी
सड़क पर धान रोपने का यह अनोखा विरोध प्रदर्शन अब पूरे इलाके में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। निवासियों ने स्पष्ट किया है कि यदि प्रशासन अब भी नींद से नहीं जागता है और सड़क निर्माण की कोई स्पष्ट समय सीमा तय नहीं करता है, तो वे अपने विरोध को और अधिक उग्र रूप देने के लिए मजबूर होंगे। निवासियों की एकमात्र मांग यह है कि जल्द से जल्द सड़क का पक्का निर्माण हो और जल निकासी की उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि उनका सामान्य जीवन बहाल हो सके।
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