मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड विवाद: गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में काजी ने छोड़े तीन पद मध्य प्रदेश एक महीने पहले 56
भोपाल के निकाह काजी मोहम्मद मआज खान नोमानी नदवी ने वक्फ बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति के विरोध में अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है।

भोपाल में वक्फ बोर्ड को लेकर बढ़ा विवाद

मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में हाल ही में की गई नियुक्तियों ने राज्य में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। बोर्ड में दो गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के फैसले का कड़ा विरोध किया जा रहा है। इस घटनाक्रम में भोपाल के निकाह काजी मोहम्मद मआज खान नोमानी नदवी ने कड़ा रुख अपनाते हुए अपने तीन महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि धार्मिक संस्थाओं में इस तरह की नियुक्तियां उन्हें स्वीकार्य नहीं हैं और इसे वे संस्था के स्वरूप के साथ छेड़छाड़ मानते हैं।

तीन प्रमुख पदों से इस्तीफा

निकाह काजी नदवी ने बुधवार को अपने इस्तीफे की घोषणा की। उन्होंने निकाह काजी के पद के साथ-साथ दो अन्य अहम जिम्मेदारियों से भी किनारा कर लिया है। उन्होंने दीनी तालीमी बोर्ड के पद और जमीयत उलेमा-ए-मध्य प्रदेश के महासचिव पद से भी त्यागपत्र दे दिया है। अपना इस्तीफा उन्होंने शहर काजी मौलाना सैयद मुश्ताक अली नदवी और जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश के अध्यक्ष मुफ्ती मोहम्मद अब्दुल कलाम कासमी को प्रेषित किया है।

इस्तीफे के पीछे का कारण

अपने इस्तीफे के पीछे का कारण बताते हुए नदवी ने कहा कि वक्फ बोर्ड पूरी तरह से मुसलमानों की एक धार्मिक और इस्लामी संस्था है। उनके अनुसार, इस्लाम में ऐसी संस्था के कामकाज में गैर-मुसलमानों की भागीदारी जायज नहीं है। उन्होंने पत्र में लिखा कि उन्होंने अब तक अपनी सभी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ किया है, लेकिन वर्तमान हालात में इन पदों पर बने रहना उनके जमीर और धार्मिक मान्यताओं के विपरीत है। इसलिए, उन्होंने पद छोड़ना ही उचित समझा है।

बोर्ड अध्यक्ष के स्वागत पर जताई आपत्ति

इस पूरे मामले में नदवी ने वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल के सार्वजनिक स्वागत पर भी गंभीर नाराजगी जाहिर की है। उनका मानना है कि धार्मिक पदों पर बैठे लोगों को इस तरह के फैसलों और गतिविधियों से दूर रहना चाहिए। इस विवाद के बीच मुफ्ती मोहम्मद मसरूर का एक वीडियो संदेश भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने भी इस नियुक्ति प्रक्रिया पर अपना विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने कहा कि धार्मिक संस्थाओं से जुड़े लोगों द्वारा इस तरह का व्यवहार समाज के एक बड़े वर्ग के लिए आहत करने वाला है।

कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

मुफ्ती मसरूर ने केवल नियुक्तियों का विरोध नहीं किया है, बल्कि वक्फ बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मस्जिद कमेटियों के नवीनीकरण की प्रक्रिया में राजनीतिक दखलंदाजी बढ़ गई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब कमेटियों के गठन के लिए सिफारिशें मांगी जा रही हैं, जो कि अनुचित है। अंत में, उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की है कि वे धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन और लिए जा रहे निर्णयों को लेकर सतर्क रहें और समय आने पर उनसे उचित सवाल जरूर पूछें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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