मध्य प्रदेश
2 घंटे पहले
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मध्य प्रदेश में बसों का संचालन जारी
मध्य प्रदेश में बसों का पहिया थमने का संकट फिलहाल टल गया है। राज्य सरकार और बस ऑपरेटर एसोसिएशन के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद ऑपरेटरों ने अपनी हड़ताल को स्थगित करने का फैसला लिया है। इस निर्णय से उन लाखों यात्रियों ने राहत की सांस ली है जो रोजाना बसों के माध्यम से अपनी यात्रा करते हैं। सरकार के साथ बनी सहमति के बाद अब प्रदेश भर में बसें अपनी तय समय सारिणी के अनुसार चलती रहेंगी।
सरकार और ऑपरेटरों के बीच बनी सहमति
बस ऑपरेटर एसोसिएशन द्वारा घोषित की गई हड़ताल को रोकने के लिए राज्य सरकार और एसोसिएशन के पदाधिकारियों के बीच दो दौर की वार्ता हुई। इस दौरान सरकार ने ऑपरेटरों की प्रमुख मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया। बातचीत के नतीजे के तौर पर यह तय हुआ कि अब सामान्य बसों का मूल किराया 2 रुपए प्रति यात्री प्रति किलोमीटर होगा। इसके साथ ही, बस का न्यूनतम टिकट मूल्य 10 रुपए निर्धारित किया गया है। बस ऑपरेटरों की इस मुख्य मांग को सरकार द्वारा मान लिए जाने के बाद हड़ताल को फिलहाल के लिए टाल दिया गया है।
समिति का गठन और एक महीने का समय
किराया वृद्धि के अलावा अन्य मांगों पर विचार करने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। यह समिति बस ऑपरेटरों से संबंधित विभिन्न तकनीकी और नीतिगत मुद्दों पर गहराई से अध्ययन करेगी। समिति जिन प्रमुख बिंदुओं पर विचार करेगी उनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं:
- सुगम परिवहन योजना में आवश्यक समायोजन करना।
- मोटरयान नियमों और पंजीयन से जुड़े विभिन्न मुद्दे।
- 15 साल पुरानी बसों के परमिट के संबंध में दिशा-निर्देश।
यह समिति एक महीने की अवधि के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपेगी। बस ऑपरेटर एसोसिएशन की ओर से स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर उनकी शेष मांगे पूरी नहीं की जाती हैं, तो वे दोबारा अपने आंदोलन की रूपरेखा तैयार करेंगे।
हड़ताल टलने से बड़े पैमाने पर लोगों को फायदा
यदि यह हड़ताल प्रभावी हो जाती, तो मध्य प्रदेश की सड़कों पर चलने वाली लगभग 50 से 60 हजार परमिट वाली बसों के पहिए पूरी तरह थम जाते। इससे प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्रों जैसे इंदौर, उज्जैन, भोपाल, देवास, नागदा और बड़नगर में आवागमन करने वाले यात्रियों पर इसका सबसे गंभीर असर पड़ता। बस सेवा बाधित होने से छात्रों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और बीमार लोगों के लिए परेशानी का पहाड़ टूट पड़ता। हालांकि, अब इस संकट के टल जाने से आम जनता ने राहत की राहत ली है और परिवहन सेवाएं पहले की तरह ही सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं।
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