भरत तिवारी एनकाउंटर मामला: परिजनों का बड़ा आरोप, पांच दिन बीतने के बाद भी पुलिस पर FIR दर्ज नहीं बिहार 2 घंटे पहले 2
भोजपुर में कथित पुलिस मुठभेड़ में मारे गए भरत तिवारी के मामले में अब तक एफआईआर दर्ज न होने पर परिजनों ने गहरा आक्रोश जताया है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस उनके बेटे को सरेंडर करने के बावजूद गोली मारकर हत्या कर दी।

न्याय के लिए भटक रहा परिवार

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुई कथित पुलिस मुठभेड़ के पांच दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक मृतक भरत तिवारी के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की है। परिवार का सीधा आरोप है कि उनके बेटे ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई।

पिता का दावा: सरेंडर के बाद मारी गई गोली

मृतक भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी, जो स्वयं बिहार पुलिस में कार्यरत रह चुके हैं, ने घटना को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि उनका बेटा पूरी तरह से पुलिस के नियंत्रण में था और उसने खुद को सौंप दिया था। पिता के अनुसार, उनके बेटे को चार गोलियां मारी गईं। उनका कहना है कि यदि उन पर कोई आरोप था भी, तो कानून के अनुसार प्रक्रिया का पालन होना चाहिए था, न कि उसे इस तरह मार दिया जाना चाहिए था।

उल्टी तरफ ग्रामीणों पर दर्ज हुए मुकदमे

एक ओर जहां पीड़ित परिवार अपनी प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए प्रशासन के चक्कर काट रहा है, वहीं दूसरी ओर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। परिजनों का आरोप है कि शाहपुर के तत्कालीन थाना प्रभारी ने मृतक के परिवार और ग्रामीणों के खिलाफ तीन अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर दिए हैं। पुलिस की इस दोहरी नीति से स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है।

न्यायिक जांच पर टिकी सबकी नजर

फिलहाल पूरा मामला राज्य सरकार द्वारा दिए गए न्यायिक जांच के आदेशों पर टिका हुआ है। पीड़ित परिवार अब इसी जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके। परिवार की मांग है कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हो और उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए। स्थानीय लोग भी इस मामले में निष्पक्ष जांच की उम्मीद लगाए बैठे हैं ताकि कानून का शासन बना रहे।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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