भीलवाड़ा में मानसून का जादू: सम्मोड़ी गांव की बंद खदान बनी लोगों का नया पसंदीदा पर्यटन स्थल राजस्थान 2 महीने पहले 89
राजस्थान के भीलवाड़ा में मानसून ने सम्मोड़ी गांव की एक पुरानी और बंद पड़ी खदान को एक बेहद खूबसूरत प्राकृतिक पर्यटन स्थल में तब्दील कर दिया है, जहाँ पर्यटक हरियाली और साफ पानी के नजारों का लुत्फ उठाने पहुंच रहे हैं।

मानसून में बदली सम्मोड़ी खदान की तस्वीर

राजस्थान के भीलवाड़ा जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सम्मोड़ी गांव इन दिनों पर्यटन का एक नया और आकर्षक केंद्र बनकर उभरा है। मानसून के आगमन के साथ ही यहां की एक बंद पड़ी पुरानी खदान ने किसी प्राकृतिक झील का रूप ले लिया है। बारिश का मौसम शुरू होते ही यह स्थान अपनी नैसर्गिक सुंदरता के कारण लोगों के आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गया है। चारों ओर फैली मखमली हरियाली, पहाड़ियों के मनमोहक दृश्य और ठंडी हवाएं यहां आने वाले हर व्यक्ति का मन मोह लेती हैं। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी और शोरगुल से दूर यह खदान अब सुकून की तलाश करने वालों के लिए एक आदर्श पिकनिक स्पॉट बन गई है।

पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र

लगातार हो रही बारिश के चलते इस बंद खदान में साफ और गहरा नीला पानी भर गया है, जो इसकी सुंदरता में चार चांद लगाता है। आसमान का प्रतिबिंब जब खदान के शांत पानी पर पड़ता है, तो यह किसी पहाड़ी पर्यटन स्थल की याद दिलाता है। छुट्टियों और सप्ताहांत के दौरान यहां लोगों की खासी भीड़ देखी जा सकती है। युवा, बच्चे और परिवार के लोग सुबह से लेकर शाम तक यहां प्रकृति के करीब समय बिताने पहुंचते हैं। कई पर्यटक तो इस खूबसूरत नजारे को अपने कैमरे में कैद करने के लिए घंटों समय बिताते हैं, ताकि वे इसे सोशल मीडिया पर साझा कर सकें। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह जगह भीलवाड़ा का एक छिपा हुआ रत्न है, जिसे अब लोग मानसून की पसंदीदा डेस्टिनेशन के रूप में पहचान रहे हैं।

प्रकृति के बीच यादगार पल

इस पर्यटन स्थल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक साथ कई तरह के अनुभव प्रदान करता है। जो लोग शांत माहौल पसंद करते हैं, वे पानी के किनारे बैठकर घंटों प्रकृति का आनंद ले सकते हैं। वहीं, कुछ लोग यहां के ठंडे पानी के पास मस्ती करना पसंद करते हैं। सुरक्षित स्थानों पर कई पर्यटक स्नान का आनंद भी लेते हैं। परिवार अक्सर अपने साथ खाने-पीने का सामान लेकर आते हैं और यहां पिकनिक मनाते हैं। प्रकृति के सानिध्य में बिताए गए ये पल लोगों के लिए यादगार बन जाते हैं। धीरे-धीरे लोगों के बीच लोकप्रियता बढ़ने के कारण हर सप्ताह यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।

फोटोग्राफी और सुकून का संगम

कुछ साल पहले तक यह खदान केवल एक सामान्य और वीरान जगह हुआ करती थी, लेकिन प्रकृति के जलभराव ने इसकी पूरी कायापलट कर दी है। अब बारिश के मौसम में यहां का नजारा किसी चित्रकार की कल्पना जैसा लगता है। पक्षियों की चहचहाहट, पानी की शांत लहरें और ठंडी हवाओं का मिश्रण पर्यटकों को मानसिक शांति प्रदान करता है। फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए तो यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है। विशेषकर सुबह और शाम के समय, जब सूर्य की हल्की किरणें पानी पर पड़ती हैं, तो पूरा इलाका किसी प्राकृतिक चित्र की तरह चमक उठता है। यही कारण है कि कैमरे के साथ पहुंचे लोग मानसून की इन खूबसूरत यादों को सहेजने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।

क्यों खास है सम्मोड़ी की यह खदान?

भीलवाड़ा और उसके आसपास के जिलों के निवासी जो मानसून के दौरान एक ऐसी जगह की तलाश में हैं, जहां उन्हें प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ शांत वातावरण भी मिले, उनके लिए सम्मोड़ी गांव की यह खदान एक बेहतरीन विकल्प है। यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को निम्नलिखित अनुभव मिलते हैं:

  • प्राकृतिक झील जैसा दृश्य: खदान में भरे साफ नीले पानी का खूबसूरत नज़ारा।
  • मनोरम हरियाली: चारों ओर फैली वनस्पतियां जो आंखों को सुकून देती हैं।
  • शांत माहौल: शहर के प्रदूषण और शोर से पूरी तरह दूर एक शांत स्थान।
  • पिकनिक का मौका: परिवार और दोस्तों के साथ यादगार समय बिताने की सुविधा।
  • फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए बेस्ट: मानसून की बारिश और पहाड़ियों की पृष्ठभूमि में बेहतरीन फोटो शूट।

कुल मिलाकर, यह स्थान अब स्थानीय पर्यटन के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण जगह बनाता जा रहा है। बारिश के मौसम में प्रकृति का भरपूर आनंद लेने और अपनी व्यस्त दिनचर्या से कुछ पल चुराने के लिए भीलवाड़ा वासियों के लिए सम्मोड़ी की यह खदान अब पहली पसंद बन चुकी है। यदि आप भी मानसून का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो यह डेस्टिनेशन आपके लिए एक यादगार सफर साबित हो सकती है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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