खरीफ सीजन में किसान न दोहराएं ये भूल, बारिश और जलभराव से बचाने के लिए अपनाएं ये उपाय राजस्थान 2 महीने पहले 79
बदलते मानसून पैटर्न के बीच कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ फसलों की सफलता अब सिर्फ बारिश पर नहीं, बल्कि पानी के सही प्रबंधन पर टिकी है। जल निकासी और नमी संरक्षण जैसे उपाय अपनाकर किसान नुकसान से बच सकते हैं।

मानसून के लगातार बदलते मिजाज ने भीलवाड़ा समेत राजस्थान के किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। कृषि जानकारों का कहना है कि अब खरीफ फसलों से अच्छी पैदावार लेना केवल बारिश के भरोसे संभव नहीं रहा, बल्कि यह इस बात पर निर्भर करता है कि खेत में पानी का प्रबंधन कितनी समझदारी से किया जाता है।

कम बारिश और जलभराव, दोनों खतरनाक

विशेषज्ञों के मुताबिक खेती को नुकसान सिर्फ कम बारिश से नहीं होता, बल्कि खेत में पानी भर जाना भी फसलों के लिए उतना ही घातक साबित हो सकता है। दोनों ही स्थितियां पूरी फसल को चौपट करने की ताकत रखती हैं, इसलिए किसानों को इन्हें हल्के में नहीं लेना चाहिए।

इन फसलों को पानी ज्यादा देर तक नहीं भाता

मक्का, सोयाबीन, मूंगफली और उड़द जैसी फसलें लंबे समय तक खेत में जमा पानी को सहन नहीं कर पातीं। ऐसे में अगर पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न हो तो इन फसलों के खराब होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

किसानों के लिए जरूरी सुझाव

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में जल निकासी की पुख्ता व्यवस्था करें, मौसम पूर्वानुमान को ध्यान में रखकर बुवाई का समय तय करें और नमी संरक्षण के तरीके अपनाएं। इन उपायों को अपनाने से जहां फसल उत्पादन बेहतर होगा, वहीं नुकसान की आशंका भी काफी हद तक कम हो जाएगी।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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