भरूच की 700 साल पुरानी जामा मस्जिद के तहखाने में मूर्तियां मिलने का दावा, वजू खाना हटाने की उठी मांग
राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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गुजरात के भरूच में स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है। करीब 700 साल पुरानी इस मस्जिद के बंद पड़े तहखाने से जैन और हिंदू धर्म से जुड़ी प्राचीन मूर्तियां मिलने के दावे के बाद माहौल गरमा गया है। इस बीच मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने भी जिला प्रशासन के समक्ष अपना पक्ष रखा है।
जानकारी के अनुसार, हाल ही में एक वीडियो सामने आया था जिसमें दावा किया गया कि मस्जिद के तहखाने में जैन धर्म के 19वें तीर्थंकर भगवान मल्लिनाथ की प्रतिमा और हिंदू देवी-देवताओं से जुड़ी कई प्राचीन मूर्तियां मौजूद हैं। यह वीडियो वायरल होने के बाद विभिन्न हिंदू और जैन संगठनों ने पूरे मामले की जांच की मांग उठाई थी।
पुरातत्व विभाग ने किया मस्जिद का निरीक्षण
शिकायतों के बाद पुरातत्व विभाग की टीम ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मस्जिद परिसर का निरीक्षण किया। जांच के दौरान तहखाने की वीडियोग्राफी भी कराई गई। दावा किया जा रहा है कि वहां संवत 1213 अंकित एक प्राचीन प्रतिमा और कई स्तंभों पर पारंपरिक नक्काशी के निशान पाए गए हैं। हालांकि, इन दावों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विभाग ने अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है और अंतिम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
इस मामले में शंकराचार्य मठ के महंत मुक्तानंद स्वामी का कहना है कि यह खोज उनके पुराने दावों को और मजबूती देती है। उनके अनुसार यह स्थान कभी जैन धर्म के ‘जैन समरी विहार’ के नाम से जाना जाता था और इसे श्री चक्रधर स्वामी का जन्मस्थल भी बताया जाता है।
जामा मस्जिद ट्रस्ट ने दावों को नकारा
दूसरी ओर, जामा मस्जिद ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने इन सभी दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि मस्जिद का इतिहास सरकारी रिकॉर्ड, 1907 के गजट और वक्फ बोर्ड के दस्तावेजों में स्पष्ट रूप से दर्ज है। ट्रस्ट ने यह भी कहा है कि धार्मिक भावनाओं को भड़काने और अनावश्यक विवाद खड़ा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा रहा है।
इसी बीच पुरातत्व विभाग ने मस्जिद परिसर में बिना अनुमति बनाए गए अतिरिक्त ‘वजू खाने’ को हटाने की कार्रवाई की है। साथ ही एक विवादित दरवाजे को भी सील कर दिया गया है। विभाग का कहना है कि यह कदम संरक्षित स्मारक से जुड़े नियमों के पालन के तहत उठाया गया है।
सभी की नजर अंतिम रिपोर्ट पर
मामले को लेकर बढ़ती चर्चाओं के बीच मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की और लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की। फिलहाल पूरे प्रकरण में सभी पक्षों की निगाहें पुरातत्व विभाग की अंतिम आधिकारिक रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई इसी रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी।
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