भागलपुर के किसान का अनोखा प्रयोग, अब बिहार में ही तैयार होंगे विंटर डॉन स्ट्रॉबेरी के पौधे भारत 2 घंटे पहले 3
भागलपुर के प्रगतिशील किसान ने इटली की विंटर डॉन स्ट्रॉबेरी की खेती को स्थानीय स्तर पर मुमकिन कर दिखाया है, जिससे महाराष्ट्र पर किसानों की निर्भरता खत्म हो गई है।

खेती के क्षेत्र में नई क्रांति

आज के दौर में किसान पारंपरिक खेती की सीमाओं से बाहर निकलकर अधिक मुनाफे वाली फसलों की ओर बढ़ रहे हैं। इसी कड़ी में मौसमी सब्जियों और फलों की खेती किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर उभरी है। बिहार के भागलपुर में अब बड़े पैमाने पर स्ट्रॉबेरी की खेती पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, स्ट्रॉबेरी की खेती करना एक चुनौतीपूर्ण काम है क्योंकि इसके पौधों की खरीद और रखरखाव काफी महंगा होता है। सही किस्म का चुनाव करना इस पूरी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।

महाराष्ट्र पर निर्भरता का अंत

भागलपुर के किसान गूंजेश गुंजन ने स्ट्रॉबेरी की खेती को लेकर एक शानदार पहल की है। उन्होंने इटली की प्रसिद्ध विंटर डॉन वेराइटी के पौधों को स्थानीय स्तर पर विकसित करने में सफलता पाई है। अब तक भागलपुर के किसानों को अपनी जरूरतों के लिए महाराष्ट्र पर निर्भर रहना पड़ता था, जहां से एक पौधा 14 रुपये की लागत में आता था। स्थानीय स्तर पर इन पौधों को तैयार करके अब गूंजेश गुंजन इन्हें मात्र 10 रुपये में उपलब्ध करा रहे हैं। चूंकि ये पौधे स्थानीय वातावरण में ही तैयार किए गए हैं, इसलिए इनके जीवित रहने की दर अधिक है और किसानों को इनकी खेती में काफी आसानी हो रही है।

विंटर डॉन किस्म की विशेषताएं

गूंजेश गुंजन का कहना है कि स्ट्रॉबेरी की यह किस्म किसानों के लिए अत्यंत फायदेमंद साबित हो रही है। इस वेराइटी की कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • अधिक फलन क्षमता: अन्य किस्मों की तुलना में यह पौधा काफी ज्यादा फल देता है, जिससे किसानों को बेहतर उत्पादन प्राप्त होता है।
  • लंबी अवधि तक पैदावार: यह किस्म मार्च महीने के अंत तक फल देती रहती है, जो इसे व्यावसायिक रूप से बेहद खास बनाती है।
  • बेहतर गुणवत्ता: विंटर डॉन से प्राप्त होने वाले फलों की गुणवत्ता बहुत अच्छी होती है और ये लंबे समय तक खराब नहीं होते हैं।
  • स्टोरेज क्षमता: इस किस्म के फलों की भंडारण क्षमता काफी अच्छी है, जिससे किसानों को उन्हें बाजार तक पहुंचाने में कम परेशानी होती है।

बाजार और आर्थिक लाभ

वर्तमान समय में स्ट्रॉबेरी एक पसंदीदा फल बन चुका है और बाजार में इसकी मांग लगातार बनी रहती है। चूंकि अब भागलपुर के स्थानीय बाजार में ही ये पौधे किफायती दामों पर मिल रहे हैं, इसलिए स्ट्रॉबेरी की खेती का दायरा बढ़ रहा है। इससे किसानों की लागत में सीधे तौर पर 4 रुपये प्रति पौधे की बचत हो रही है, जिससे उनके मुनाफे में इजाफा होना तय है। स्थानीय स्तर पर पौधों की उपलब्धता सुनिश्चित होने से नए किसानों के लिए भी खेती की राह आसान हो गई है और स्ट्रॉबेरी अब लोगों तक ताजी अवस्था में पहुंच पा रही है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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