ड्रिप सिंचाई तकनीक: कम पानी में बंपर पैदावार के साथ पाएं 90 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान झारखंड 8 घंटे पहले 8
आधुनिक खेती में जल संकट से निपटने के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई वरदान साबित हो रही है, जिससे न केवल पानी की बचत होती है बल्कि फसलों की पैदावार में भी काफी बढ़ोतरी होती है।

खेती में आधुनिक सिंचाई का महत्व

मौजूदा समय में खेती के दौरान जल प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन चुका है। सिंचाई के सीमित संसाधनों और पानी की बढ़ती जरूरतों के बीच किसान अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर नई तकनीक अपना रहे हैं। ड्रिप यानी टपक सिंचाई और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणाली किसानों के लिए न केवल फायदेमंद है बल्कि यह समय की मांग भी है। आधुनिक सिंचाई तकनीक अपनाकर किसान कम पानी में भी अधिक पैदावार हासिल कर सकते हैं। इस प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पौधों को आवश्यकतानुसार पानी और पोषक तत्व सीधे जड़ों तक पहुंचाए जाते हैं, जिससे पौधों का विकास तेजी से और बेहतर तरीके से होता है।

सीधी जड़ों तक पानी और उर्वरक की आपूर्ति

कृषि विशेषज्ञ विनोद पांडे के अनुसार, ड्रिप सिंचाई प्रणाली में पौधों की पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विशेष व्यवस्था होती है। इस तकनीक में पानी के साथ ही घुलनशील उर्वरकों को मिलाकर सीधे फसल की जड़ों तक पहुंचाया जा सकता है, जिसे फर्टिगेशन कहा जाता है। बागवानी फसलों और सब्जियों की खेती करने वाले किसानों के लिए यह तकनीक बेहद कारगर मानी जाती है। ड्रिप सिस्टम का उपयोग करने से खेतों में पानी की बर्बादी काफी हद तक कम हो जाती है और मिट्टी की ऊपरी सतह के नीचे आवश्यक नमी लंबे समय तक बरकरार रहती है।

फ्लड इरिगेशन के नुकसान से बचाव

आज भी कई किसान पारंपरिक रूप से फ्लड इरिगेशन यानी पूरे खेत में पानी भरकर सिंचाई करने की पद्धति अपनाते हैं। हालांकि, हर प्रकार की फसल को अत्यधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती है। जरूरत से ज्यादा पानी देने से न केवल जल संसाधनों का अपव्यय होता है, बल्कि पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचने की संभावना भी बनी रहती है। अधिक जलभराव से पौधों में कई प्रकार के रोग पनपने का खतरा भी रहता है। इसके विपरीत, ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक तकनीकों से पानी को नियंत्रित तरीके से पौधों तक पहुंचाया जाता है, जिससे मिट्टी का संतुलन भी बना रहता है और फसल को अनावश्यक नुकसान नहीं होता है।

उत्पादन में वृद्धि और खरपतवार पर लगाम

ड्रिप सिंचाई का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी है कि इससे खेत में खरपतवार की समस्या काफी कम हो जाती है। चूंकि पानी पूरे खेत में न फैलकर केवल पौधों की जड़ों के पास ही सीमित रहता है, इसलिए खाली जगह पर खरपतवार को पनपने के लिए नमी नहीं मिलती। खरपतवार कम होने से मुख्य फसल को अधिक पोषण मिलता है और उसकी ग्रोथ बेहतर होती है। सब्जी उत्पादन और बागवानी के क्षेत्र में यह तकनीक किसानों की लागत को कम करने और मुनाफे को बढ़ाने के लिए एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरी है।

सरकारी अनुदान का उठाएं लाभ

सूक्ष्म सिंचाई को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सरकार की ओर से किसानों को आर्थिक सहायता भी प्रदान की जाती है। विभिन्न सरकारी योजनाओं के तहत किसान स्प्रिंकलर और ड्रिप सिस्टम लगाने पर सब्सिडी प्राप्त कर सकते हैं। पात्रता के आधार पर नियमों और शर्तों का पालन करते हुए किसानों को इन उपकरणों पर 90 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान मिल सकता है। किसान अपने नजदीकी कृषि या उद्यान विभाग के कार्यालय में संपर्क कर इस योजना के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। आधुनिक सिंचाई को अपनाकर न केवल जल संरक्षण किया जा सकता है, बल्कि अपनी आमदनी को नई ऊंचाइयों पर भी ले जाया जा सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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