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एक घंटा पहले
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विचारों
किसान भाई अलग-अलग साग-सब्जियों के साथ-साथ पुदीने की खेती में भी हाथ आजमा सकते हैं। यह एक ऐसी फसल है जिससे साल भर पैदावार मिलती रहती है और लगातार मुनाफा होता है। गर्मी हो या सर्दी, हर मौसम में यह अच्छी तरह बढ़ता है। सिर्फ बरसात के दिनों में यह थोड़ा कमजोर पड़ता है, लेकिन बारिश थमते ही दोबारा लहलहाने लगता है। ऐसे में जो किसान अच्छी आमदनी चाहते हैं, वे पुदीने की खेती से बेहतर कमाई कर सकते हैं। आइए, इसकी पूरी खेती की विधि समझते हैं।
दादा-परदादा के जमाने से चली आ रही खेती
बहराइच जिले के भोगा जोत में रहने वाले किसान निसार अहमद इन दिनों पुदीने की खेती को लेकर खूब चर्चा में हैं। वे बताते हैं कि उनके परिवार में दादा-परदादा के समय से ही पुदीना उगाया जाता रहा है। इसकी वजह साफ है—यह एक फायदे का सौदा है, जिसमें कमाई तय रहती है, बस कभी ज्यादा तो कभी थोड़ी कम हो जाती है।
कम देखभाल में 4 से 5 बार कटाई
निसार अहमद के मुताबिक, पुदीने की फसल को बहुत ज्यादा देखभाल की जरूरत नहीं पड़ती। बुवाई के बाद बस समय पर खाद और पानी देते रहें, तो यह अपने आप तैयार हो जाता है। इसकी पैदावार भी अच्छी रहती है और आसानी से 4 से 5 बार कटाई हो जाती है। कटाई के बाद भी पौधों की बढ़वार जारी रहती है।
बरसात के दिनों में पुदीना अपने आप सड़कर खत्म होने लगता है, मगर जो थोड़ा-बहुत बच जाता है, वह बारिश के बाद फिर से फूटने लगता है और धीरे-धीरे पूरे खेत में फैल जाता है। इस वजह से इसे बार-बार दोबारा लगाने की जरूरत भी नहीं पड़ती।
बरसात के बाद बुवाई क्यों है सबसे फायदेमंद
जो किसान पुदीने की खेती की योजना बना रहे हैं, उनके लिए बरसात खत्म होने के तुरंत बाद का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। बारिश के दौरान पुदीना सड़ने लगता है और धीरे-धीरे खेत से समाप्त हो जाता है, इसलिए बरसात के तुरंत बाद बुवाई कर देनी चाहिए। ठंड के मौसम में इसकी बढ़वार कुछ धीमी रहती है, लेकिन गर्मी आते ही यह तेजी से बढ़ने लगता है। इस तरह किसान इससे बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं।
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