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एक घंटा पहले
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बीसीसीआई का सख्त रुख
भारतीय क्रिकेट में अब किसी खिलाड़ी का चयन और उसे फिट घोषित करना पहले जितना सरल नहीं रह गया है। बार-बार फिटनेस संबंधी समस्याओं के चलते खिलाड़ियों के टीम से बाहर होने के मामलों से सीख लेते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने सिलेक्शन कमेटी और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के साथ मिलकर फिटनेस के प्रति अपना नजरिया बेहद सख्त कर लिया है। अब किसी भी खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने के लिए हरी झंडी देने से पहले बीसीसीआई उसकी फिटनेस को लेकर पूरी तरह आश्वस्त होना चाहता है।
200 प्रतिशत फिटनेस की अनिवार्यता
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस नई नीति को लागू करने का मुख्य उद्देश्य उन परिस्थितियों से बचना है, जहां किसी खिलाड़ी को टीम में चुने जाने के कुछ दिन बाद ही चोटिल होने के कारण बाहर होना पड़ता है। बोर्ड से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अब बीसीसीआई किसी खिलाड़ी की उपलब्धता को लेकर केवल 100 प्रतिशत नहीं, बल्कि 200 प्रतिशत तक सुनिश्चित होना चाहता है।
हर्षित राणा और अन्य उदाहरण
इस बदलाव की एक बड़ी वजह तेज गेंदबाज हर्षित राणा का प्रकरण है। लगभग पांच महीने के अंतराल के बाद जून में आयरलैंड और इंग्लैंड दौरे के लिए उनकी टीम में वापसी हुई थी, लेकिन मात्र दो सप्ताह के भीतर ही वे चोटिल होकर बाहर हो गए। इस कारण उन्हें इंग्लैंड दौरे से वापस बुलाना पड़ा और उनकी जगह प्रिंस यादव को मौका दिया गया। केवल हर्षित ही नहीं, बल्कि श्रीलंका टेस्ट सीरीज के लिए जसप्रीत बुमराह और साई सुदर्शन के स्थान पर आकिब नबी और सरफराज खान को बुलाना पड़ा था। इसी प्रकार, आयरलैंड और इंग्लैंड के दौरे पर नितीश कुमार रेड्डी की जगह सूर्यांश शेडगे को और जिम्बाब्वे दौरे पर वरुण चक्रवर्ती के स्थान पर रवि बिश्नोई को अंतिम समय में शामिल करना पड़ा था।
फिटनेस टेस्ट की नई शर्तें
इन लगातार बदलावों के कारण अब सेंटर ऑफ एक्सीलेंस अतिरिक्त सावधानी बरत रहा है। हालिया समय में कई खिलाड़ियों का चयन फिटनेस टेस्ट पास करने की कठोर शर्तों के साथ किया गया है। अफगानिस्तान के खिलाफ T20I सीरीज के लिए चुनी गई टीम में जसप्रीत बुमराह, वॉशिंगटन सुंदर, नितीश कुमार रेड्डी और हर्षित राणा के नाम के साथ फिटनेस संबंधी स्पष्ट शर्तें जुड़ी हुई हैं।
पारदर्शिता पर बीसीसीआई का जोर
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने इस नीति को लेकर स्पष्ट किया है कि इसका उद्देश्य चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता लाना है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को भी यह स्पष्ट पता होता है कि वे आगामी सीरीज के लिए पूरी तरह से तैयार हैं या नहीं। यह पूरी कवायद खिलाड़ी के करियर और टीम के बेहतर भविष्य को ध्यान में रखकर की जा रही है, जिससे चयन और फिटनेस रिपोर्ट को लेकर अब पारदर्शिता में काफी सुधार हुआ है।
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